
धमतरी। 13 जून को थाना रुद्री के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना मिली कि 14 जून को एक नाबालिग लड़की की शादी हो रही है। इस सूचना के आधार पर कलेक्टर के आदेश और जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशानुसार एक जिला स्तरीय टीम ने बाल विवाह रोकने के लिए संबंधित गांव का दौरा किया। टीम ने लड़की के माता-पिता से उसकी उम्र की जानकारी प्राप्त की।
गुमराह करने की कोशिश
शुरुआत में परिवार ने टीम को काफी गुमराह करने की कोशिश की। शादी में शामिल दो लड़कियों में से एक बड़ी बहन बालिग थी, जबकि छोटी बहन नाबालिग थी। परिवार ने बड़ी बहन का मार्कशीट दिखाकर यह दावा किया कि केवल एक ही लड़की का विवाह हो रहा है। इसके बाद, गांव के सरपंच और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बुलाकर पंचनामा तैयार किया जा रहा था।
जिला बाल संरक्षण इकाई की चाइल्ड हेल्पलाइन केंद्र की समन्वयक, नीलम साहू ने बाल विवाह कानून के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह करना कानूनी अपराध है। यदि कोई बाल विवाह होता है, तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें 2 साल की सजा और जुर्माना भी शामिल है।
शादी रुकवाने की प्रक्रिया
लड़की के पिता ने अंततः बताया कि दोनों लड़कियों की शादी की योजना है। जब छोटी लड़की की अंकसूची देखी गई, तो उसकी उम्र 16 वर्ष निकली। इसके बाद शादी रोकने के लिए एक वचन पत्र भरा गया। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी देने पर परिवार ने विवाह रोकने पर सहमति व्यक्त की। लड़के के पक्ष को भी मोबाइल के माध्यम से सूचित किया गया और उन्हें समझाया गया। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने भी शादी रोकने पर सहमति जताई और लड़की के बालिग होने पर ही विवाह करने के लिए वचन पत्र भरा गया।



