
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। सदन में प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की मौत का मामला गूंजा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार को घेरते हुए जेलों की बदहाल स्थिति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्ष ने कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की मौत को ‘सरकारी हत्या’ करार दिया और इसकी जांच विधानसभा की विशेष समिति से कराने की मांग की। सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल में गूंजा मौतों का आंकड़ा: गृहमंत्री ने पेश की रिपोर्ट
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भूपेश बघेल ने जेलों में बंदियों की मौत और क्षमता से अधिक कैदियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने गृहमंत्री से पूछा कि पिछले एक साल में कितनी मौतें हुईं। जवाब में गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रदेश की अलग-अलग जेलों में कुल 66 बंदियों की मौत हुई है। इनमें से 18 मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में अभी जांच जारी है।
जीवन ठाकुर की मौत पर तीखी बहस: बघेल ने लगाए गंभीर आरोप
भूपेश बघेल ने आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेजा गया था। बघेल का आरोप था कि जेल प्रशासन ने उन्हें उनके परिजनों से मिलने नहीं दिया और बीमार होने के बावजूद सही इलाज मुहैया नहीं कराया। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर की सलाह के बाद भी उन्हें समय पर अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, जिससे उनकी जान चली गई। बघेल ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही बताया।
गृहमंत्री का पलटवार: ‘जेल में सहयोग नहीं कर रहे थे जीवन ठाकुर’
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जीवन ठाकुर के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती गई। उन्होंने जेल अधीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि जीवन ठाकुर शुगर के मरीज थे लेकिन वे जेल के भीतर खान-पान में परहेज नहीं करते थे। शर्मा ने कहा कि वे जानबूझकर ऐसा व्यवहार कर रहे थे जिससे उनका शुगर लेवल बढ़ जाए ताकि उन्हें अस्पताल भेजा जा सके। गृहमंत्री ने साफ किया कि उन्हें न्यायालय की अनुमति के बाद ही बेहतर इलाज के लिए रायपुर लाया गया था।
पिता-पुत्र को अलग रखने पर तकरार
बहस के दौरान भूपेश बघेल ने एक और भावनात्मक मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जीवन ठाकुर के साथ उनके बेटे को भी गिरफ्तार कर उसी जेल में रखा गया था, लेकिन प्रशासन ने दोनों को एक साथ रहने की अनुमति नहीं दी। बघेल का तर्क था कि यदि बेटा साथ होता, तो वह अपने बीमार पिता की बेहतर देखभाल कर सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों को भी उनसे मिलने से रोका गया, जो अलोकतांत्रिक है।
विधानसभा समिति से जांच की मांग और हंगामा
विपक्ष ने इस मामले की न्यायिक जांच को नाकाफी बताते हुए विधानसभा की विशेष समिति से जांच कराने की जिद पकड़ ली। कांग्रेस विधायकों ने सदन के बीचों-बीच आकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का कहना था कि जब मामला इतना गंभीर है तो इसकी निष्पक्ष जांच सदन की देखरेख में होनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि जब मजिस्ट्रेट जांच चल रही है, तो दूसरी जांच की आवश्यकता नहीं है।
प्रदेश में बढ़ते अपराधों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
जेलों के मुद्दे के साथ-साथ भूपेश बघेल ने राज्य में बढ़ते अपराधों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। गृहमंत्री ने इन आंकड़ों को सिरे से नकारते हुए कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद से अपराधों पर लगाम लगी है और पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है।
कस्टोडियल डेथ की स्थिति: एक नजर में
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, जेलों में हुई मौतों की वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- कुल मौतें (जनवरी 2025 – जनवरी 2026): 66
- जांच पूर्ण (न्यायिक मजिस्ट्रेट): 18 मामले
- जांच जारी: 48 मामले
- विपक्ष की मुख्य मांग: सदन की विशेष समिति से जांच
वॉकआउट के साथ समाप्त हुई चर्चा
सरकार के जवाब और जांच समिति बनाने से इनकार करने पर कांग्रेस विधायक दल ने कड़ा विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों ने “न्याय दो” के नारे लगाए और सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए बाहर निकल गए। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए प्रभावित हुई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वह स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।
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