
धमतरी: Dhamtari News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान से प्रेरित होकर, धमतरी जिला प्रशासन ने इस बार दीपावली के पर्व को स्वदेशी भावना और परंपरागत संस्कृति के साथ मनाने का विशेष निर्णय लिया है। प्रशासन ने स्थानीय कुम्हारों और ग्रामीण कारीगरों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीयों को बढ़ावा देने की पहल की है, ताकि उनका उत्साह बढ़े और उन्हें आर्थिक मजबूती मिले।

दीया विक्रेताओं को कर मुक्त सुविधा
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले के सभी नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि दीपावली बाजार में मिट्टी के दीयों की बिक्री करने वाले ग्रामीणों और कुम्हारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

- कोई शुल्क नहीं: कलेक्टर ने निर्देश दिया है कि दीयों की बिक्री करने वाले इन पारंपरिक कारीगरों से किसी भी प्रकार का कर या शुल्क न वसूला जाए।
कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि ये कारीगर हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं, और उनके हाथ से बने दीये हमारी लोककला और परंपरा की पहचान हैं। ऐसे में प्रशासन का दायित्व है कि उन्हें प्रोत्साहन दिया जाए।
‘स्वदेशी अपनाएं, परंपरा सजाएं’ का संदेश
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे “स्वदेशी अपनाएं, परंपरा सजाएं” और “वोकल फॉर लोकल से जगमगाए हर आंगन” जैसे स्लोगन के साथ नागरिकों को मिट्टी के दीयों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे बाजार में चीन या प्लास्टिक से बने कृत्रिम प्रकाश उत्पादों की जगह स्थानीय कुम्हारों के दीये खरीदें। उनका मानना है कि दीपावली सिर्फ रोशनी का नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का पर्व है। स्वदेशी वस्तुएं अपनाने से देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और ग्रामीण शिल्पकारों को आजीविका मिलती है।
जिला प्रशासन ने सभी निकायों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि स्थानीय बाजारों में दीया बेचने वालों के लिए उचित स्थान पर व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपने उत्पादों का प्रदर्शन सुचारू रूप से कर सकें। इस पहल से धमतरी जिले के घर-आंगन इस बार परंपरा, संस्कृति और स्वदेशी गर्व की चमक से जगमगाते नजर आएंगे।
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