
छत्तीसगढ़ में प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी दुविधा वाली स्थिति पैदा हो गई है। आगामी 8 फरवरी को छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की महत्वपूर्ण परीक्षाएं एक साथ होने जा रही हैं। एक ही दिन और एक ही समय पर दो अलग-अलग स्तर की परीक्षाएं होने से परीक्षार्थियों में असमंजस है। बड़ी लापरवाही की वजह से राज्य के हजारों युवाओं को अब अपनी मेहनत और करियर को दांव पर लगाकर किसी एक परीक्षा को छोड़ना पड़ सकता है।
इंजीनियरिंग छात्रों पर दोहरी मार: व्यापमं और यूपीएससी के बीच फंसे अभ्यर्थी
व्यापमं ने 8 फरवरी को नया रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA) में जूनियर इंजीनियर के पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया है। वहीं, यूपीएससी ने काफी समय पहले से ही इसी तारीख को इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES/ESE) प्रीलिम्स 2026 की घोषणा कर रखी थी। विडंबना यह है कि दोनों ही परीक्षाएं इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों के लिए हैं। ऐसे में लगभग 20 हजार छात्र इस बात को लेकर परेशान हैं कि वे प्रदेश की सेवा के लिए परीक्षा दें या केंद्र की प्रतिष्ठित नौकरी के लिए प्रयास करें।
नियमों की अनदेखी: कैलेंडर जारी करने में हुई बड़ी चूक
केंद्र सरकार और विभिन्न भर्ती एजेंसियों के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य की परीक्षाओं का कैलेंडर इस तरह तैयार किया जाए कि वे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से न टकराएं। इसके पीछे मकसद यह है कि छात्रों को हर अवसर का लाभ उठाने का पूरा हक मिले। यूपीएससी साल भर पहले ही अपनी तारीखें जारी कर देता है, ऐसे में व्यापमं द्वारा उसी दिन परीक्षा रखना प्रशासनिक स्तर पर बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। छात्रों का तर्क है कि व्यापमं को परीक्षा तिथि तय करने से पहले केंद्रीय कैलेंडर की जांच करनी चाहिए थी।
छात्रों की मांग: तारीख बदलने के लिए व्यापमं को सौंपा ज्ञापन
इस संकट को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों ने व्यापमं कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि NRDA जूनियर इंजीनियर परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाया जाए ताकि वे निर्बाध रूप से यूपीएससी की परीक्षा में भी शामिल हो सकें। छात्रों का कहना है कि उन्होंने महीनों से दोनों परीक्षाओं के लिए कठिन परिश्रम किया है, लेकिन तारीखों के इस टकराव की वजह से उनका एक साल खराब हो सकता है। फिलहाल व्यापमं की ओर से इस मामले में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
अधिकारियों का रुख: राहत की उम्मीद में बैठे हजारों उम्मीदवार
व्यापमं को आवेदन सौंपने के बाद भी अब तक परीक्षा की समय सारणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस विषय पर विचार कर रहे हैं, लेकिन समय कम होने के कारण छात्रों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। यदि जल्द ही परीक्षा की तारीख नहीं बदली गई, तो हजारों काबिल इंजीनियरों को किसी एक सपने से हाथ धोना पड़ेगा। अब सबकी नजरें शासन और व्यापमं के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई नरम रुख अपनाते हैं या नहीं।



