कुंभ मेला भारत का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, जिसे हर बारह साल में चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है।
कुंभ मेला में लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिए आते हैं, जो आस्था का प्रतीक है।
कुंभ मेले की शुरुआत समुद्र मंथन से जुड़ी एक पौराणिक कथा से होती है।
समुद्र मंथन से 14 बहुमूल्य रत्नों में से एक अमृत कलश भी निकला था, जिसके कारण कुंभ का आयोजन हुआ।
अमृत कलश को लेकर देवताओं और दानवों के बीच संघर्ष हुआ था, जिससे अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिर गईं।
इन बूंदों के गिरने से पृथ्वी पर चार स्थानों - प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक - को पवित्र माना गया।
कुंभ मेला का आयोजन त्रिवेणी संगम, गंगा, यमुन और सरस्वती के संगम स्थल पर विशेष रूप से होता है।
मान्यता है कि कुंभ मेले में स्नान करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे।
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