प्राकृतिक निर्माण
कुटुमसर गुफा का निर्माण लगभग 250 मिलियन वर्ष पहले चूना पत्थर पर पानी के निरंतर प्रवाह से हुआ था।
गुफा की लंबाई और गहराई
यह गुफा लगभग 4500 फीट लंबी और 60 से 120 फीट गहरी है।
प्राकृतिक स्तंभ और आकृतियाँ
गुफा में कैल्सियम से बने प्राकृतिक स्तंभ और विभिन्न आकृतियाँ हैं, जिन्हें स्थानीय लोग देवी-देवताओं के रूप में पूजते हैं।
शंकरकुंड झील
गुफा के अंदर एक छोटी सी झील है, जिसे 'शंकरकुंड' कहा जाता है, जो लगभग 4.5 फीट गहरी और 17 फीट लंबी है।
अंधी मछलियाँ
गुफा में अंधी मछलियाँ पाई जाती हैं, जिनकी आंखों पर एक पतली झिल्ली बन गई है, जिससे वे पूरी तरह से अंधी हो गई हैं।
गुफा का तापमान
गुफा का तापमान बाहर के तापमान से लगभग 10 डिग्री कम होता है, जिससे अंदर ठंडक बनी रहती है।
गुफा का नामकरण
गुफा का नाम 'कोटमसर' स्थानीय भाषा में 'पानी से घिरा क़िला' के अर्थ में रखा गया है।
प्राचीन मानव अवशेष
गुफा में प्राचीन मानवों के रहने के अवशेष पाए गए हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
सुरक्षा कारणों से बंद
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गुफा को सुरक्षा कारणों से बारिश के मौसम में बंद कर दिया जाता है और सर्दियों में पर्यटकों के लिए खोला जाता है।
पर्यटन स्थल
कुटुमसर गुफा बस्तर क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जहाँ पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का आनंद लेने आते हैं।