
बालोद: Balod News: किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा में अगर यमराज और यमदूत भी शामिल हों, तो शवयात्रा अपने आप में अनोखी बन जाती है। बालोद जिले के ग्राम फुलझर में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब 80 वर्षीय बिहारीलाल यादव की शवयात्रा निकली।

ग्रामीणों ने शवयात्रा के आगे यमराज और यमदूतों का वेश धारण कर चलने का निर्णय लिया। उनके पीछे जसगीत और भजन गाते हुए लोग शामिल हुए। इस दृश्य को देखने पूरा गांव उमड़ पड़ा और हर घर से कोई न कोई व्यक्ति अंतिम विदाई देने पहुंचा।
गांव की पहचान बने थे बिहारीलाल यादव
बिहारीलाल यादव ने अपना पूरा जीवन गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संवारने में समर्पित कर दिया था। वे भजन-कीर्तन, जसगीत, नृत्य और नाटकों में पौराणिक प्रसंगों पर आधारित किरदार निभाकर गांव को विशेष पहचान दिलाते थे।
- उन्होंने 100 से अधिक भक्ति गीत लिखे और प्रस्तुत किए।
- नवरात्रि में जसगीत और होली पर फाग गीतों से पूरे गांव को आनंदित करते।
- नाटकों में सिर्फ पुरुष किरदार ही नहीं, बल्कि तारामती और राजा मोरध्वज की पत्नी जैसे महिला पात्रों को भी जीवंत कर देते।

उनकी अदाकारी इतनी असरदार थी कि दर्शकों की आंखों से आंसू निकल आते थे।
अनोखी विदाई बनी मिसाल
ग्रामीणों का कहना है कि बिहारीलाल यादव गांव की आत्मा थे। उनकी वजह से फुलझर गांव को आसपास के इलाकों में पहचान मिली। इसलिए उनकी अंतिम यात्रा को भी यादगार बनाने का फैसला लिया गया। यमराज और यमदूतों की अगुवाई वाली यह शवयात्रा गांव की परंपरा, आस्था और सम्मान की मिसाल बन गई।



