
नई दिल्ली: आपने भी अक्सर महसूस किया होगा: जब हम किसी नई मंजिल की ओर रोड ट्रिप पर निकलते हैं, तो सफर बेहद लंबा लगता है, लेकिन वापसी का वही रास्ता आश्चर्यजनक रूप से छोटा महसूस होता है। यह सवाल कई लोगों के दिमाग में आता है कि क्या सच में वापसी में हमारी गाड़ी की रफ्तार बढ़ जाती है, या यह केवल दिमाग का भ्रम है? आइए जानते हैं इसके पीछे का असली वैज्ञानिक कारण।
यह है दिमाग की ‘समय की धारणा’ का खेल
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पूरा अनुभव हमारे मस्तिष्क की “टाइम परसेप्शन” (समय की धारणा) से जुड़ा है। जब हम पहली बार किसी रास्ते पर जाते हैं, तो हमारा मस्तिष्क हर नए दृश्य, मोड़ और अनुभव को गहराई से प्रोसेस और स्टोर करने में व्यस्त हो जाता है। मस्तिष्क द्वारा ज्यादा जानकारी प्रोसेस करने के कारण ही हमें लगता है कि सफर बहुत लंबा खिंच रहा है।
वापसी में दिमाग हो जाता है ‘रिलैक्स’
वापसी के दौरान स्थिति बिल्कुल विपरीत हो जाती है। हमारा दिमाग पहले से ही उस रास्ते, दृश्यों और अनुभवों से परिचित होता है। इसलिए, उसे ज्यादा नई जानकारी प्रोसेस नहीं करनी पड़ती और वह रिलैक्स अवस्था में होता है। यही वजह है कि वही सफर हमें कम समय में पूरा हुआ सा महसूस होता है, भले ही वास्तव में उतना ही समय लगा हो।
“रिटर्न ट्रिप इफेक्ट” पर हुई रिसर्च
नीदरलैंड्स की लीडेन यूनिवर्सिटी (Leiden University) के वैज्ञानिकों ने इस घटना को “रिटर्न ट्रिप इफेक्ट” नाम दिया है। इस पर किए गए रिसर्च में यह पाया गया कि लगभग 80% लोग लौटते वक्त सफर को कम लंबा महसूस करते हैं, भले ही वास्तविक समय पूरी तरह समान रहा हो। यह प्रभाव एक सामान्य मानवीय अनुभव है।
उत्सुकता और उम्मीदों का भी होता है असर
हमारे मूड और उम्मीदों का भी समय की धारणा पर गहरा असर पड़ता है।
- जाते समय: जब हम किसी नई जगह के लिए निकलते हैं, तो हमें गंतव्य तक पहुँचने की बेचैनी और उत्सुकता रहती है, जिससे हर पल लंबा लगता है।
- लौटते समय: वहीं, वापसी में हमारा मूड शांत और रिलैक्स होता है। हमें पहले से ही अंदाज़ा होता है कि हम कितनी देर में घर पहुँचेंगे, जिससे समय जल्दी बीतता हुआ प्रतीत होता है।
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