CG Budget Session 2026 Video: छत्तीसगढ़ विधानसभा: आत्मानंद स्कूल के टीचर हटाए जायेंगे?.. इस कक्षा में एडमिशन बंद करने का फैसला, सरकार ने दी सदन में जानकारी

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सदन की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल में प्रदेश के बहुचर्चित स्वामी आत्मानंद स्कूलों के भविष्य और उनके संचालन को लेकर तीखी बहस हुई। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन स्कूलों के ढांचे में आगामी सत्र से बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। विपक्ष ने स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और छोटे बच्चों की कक्षाओं को लेकर सवाल उठाए थे, जिस पर शिक्षा मंत्री के जवाब ने हजारों अभिभावकों और वहां कार्यरत शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।

प्री-नर्सरी कक्षाएं होंगी बंद

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आत्मानंद स्कूलों में प्री-नर्सरी यानी केजी-1 और केजी-2 की कक्षाओं के संचालन पर सरकार की स्थिति जाननी चाही। इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र से आत्मानंद स्कूलों में प्री-नर्सरी की कक्षाएं नहीं चलाई जाएंगी। सरकार ने फैसला लिया है कि अब इन कक्षाओं में नए बच्चों का दाखिला (एडमिशन) नहीं लिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है, जिससे स्कूलों के प्रबंधन में सुधार होगा।

शिक्षकों की छुट्टी का खतरा

स्कूलों में कक्षाएं बंद होने का सीधा असर वहां कार्यरत स्टाफ पर पड़ने वाला है। शिक्षा मंत्री ने सदन में संकेत दिया कि डीएमएफ (DMF) फंड के प्रावधानों में बदलाव होने के कारण प्री-प्राइमरी स्तर के शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। चूंकि इन शिक्षकों का वेतन मुख्य रूप से जिला खनिज संस्थान न्यास निधि से आता था, नियमों में फेरबदल के बाद अब उनके मानदेय और पद को बरकरार रखना मुश्किल हो रहा है। इस घोषणा के बाद से स्कूलों में संविदा और अस्थाई तौर पर पढ़ा रहे शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

सदन में कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पिछली सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे गरीब बच्चों की शुरुआती अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रभावित होगी। विपक्ष ने पूछा कि यदि एडमिशन बंद किए जा रहे हैं, तो उन बच्चों का क्या होगा जो पहले से वहां पढ़ रहे हैं। सदन में हुई इस चर्चा से साफ है कि आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग के इस निर्णय पर सड़क से लेकर सदन तक सियासी घमासान और तेज होने वाला है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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