छत्तीसगढ़ में फर्जी आदेश पर सालों सरकारी नौकरी की, चार बर्खास्त, FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। वर्ष 2021 में राज्य शिक्षा आयोग के नाम से जारी फर्जी आदेश के आधार पर चार लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की थी। जांच पूरी होने के बाद शिक्षा विभाग ने चारों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है।

खैरागढ़ से जुड़ा मामला, शिक्षा विभाग पर सवाल

यह मामला खैरागढ़ क्षेत्र से जुड़ा है, जहां फर्जी नियुक्ति आदेश के सहारे वर्षों तक सरकारी सेवा में बने रहने का खुलासा हुआ। जांच के बाद जैसे ही सच्चाई सामने आई, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे। अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

2021 में हुई थी नियुक्तियां

साल 2021 में टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को जिले के अलग-अलग स्कूलों और कार्यालयों में सहायक ग्रेड-3 और डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया गया था। इसके अलावा डोलामणी मटारी, सादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा और अमीन शेख भी उस समय जिले के विद्यालयों में पदस्थ थे।

जांच में सामने आई फर्जीवाड़े की परतें

नियुक्ति दस्तावेजों की जांच के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। सितंबर 2021 में राज्य शिक्षा आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के नाम से जारी जिस आदेश का इस्तेमाल किया गया था, उसका क्रमांक वास्तव में बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी पत्र से जुड़ा पाया गया।

हस्ताक्षर भी नहीं मिले रिकॉर्ड से

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आदेश पर मौजूद सचिव के हस्ताक्षर आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे। इससे यह साफ हो गया कि कूटरचना कर फर्जी आदेश तैयार किया गया और उसी के आधार पर शासकीय सेवा में प्रवेश किया गया, जिसे गंभीर अपराध माना गया है।

बर्खास्तगी और FIR की कार्रवाई

शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद डीईओ की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

2025 में खुला मामला, निष्पक्ष जांच का दावा

मई 2022 में चारों को अलग-अलग स्कूलों और कार्यालयों में पदस्थ किया गया था। अगस्त 2025 में मामला उजागर होने के बाद आरोपियों ने अवकाश लेकर खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनके दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए। डीईओ लालजी द्विवेदी ने कहा कि शासकीय सेवा में धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि अन्य लोग भी इसमें शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Also Read: दामाखेड़ा का बदला नाम: अब ‘कबीर धर्म नगर’ के नाम से जाना जाएगा कबीरपंथियों का बड़ा तीर्थ, राजपत्र में अधिसूचना जारी

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button