Dussehra 2025: दशहरा विजयादशमी पर नीलकंठ दर्शन का क्या है महत्व और क्यों माना जाता है इसे शुभ?

Dussehra 2025: दशहरा यानी विजयादशमी का दिन असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इस मंगल पर्व पर, नीलकंठ पक्षी (Neelkanth Bird) का दर्शन अत्यंत शुभ और सौभाग्य का सूचक माना गया है। धर्मशास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नीलकंठ पक्षी को स्वयं भगवान शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव को भी विषपान के कारण नीले कंठ वाला होने की वजह से नीलकंठ कहा जाता है। मान्यता है कि नीलकंठ पक्षी शिव जी का रूप धारण कर धरती पर विचरण करते हैं।

क्यों शुभ माना जाता है नीलकंठ का दर्शन?

दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को कई कारणों से भाग्य जगाने वाला माना गया है:

  1. शिव का आशीर्वाद: नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना गया है। विजयादशमी के दिन इसके दर्शन करने से भगवान शिव का सीधा आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  2. सुख-समृद्धि का प्रतीक: नीलकंठ को सुख-समृद्धि, शांति, सौम्यता और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। दर्शन होने पर घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है और सभी शुभ कार्य बिना रुकावट के होते रहते हैं।
  3. सफलता का संकेत: एक प्राचीन कहावत है: “नीलकंठ के दर्शन पाए, घर बैठे गंगा नहाए।” दशहरे पर यदि यह पक्षी दिख जाए, तो माना जाता है कि आपका भाग्य चमक उठेगा और आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी।

नीलकंठ दर्शन से जुड़ी पौराणिक कथा

नीलकंठ के दर्शन को शुभ मानने के पीछे भगवान राम से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है:

  • रावण वध से पहले दर्शन: मान्यता है कि अहंकारी रावण के साथ अंतिम युद्ध से पहले, प्रभु श्री राम ने शुभ शकुन के रूप में नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। इसके बाद ही उन्होंने असत्य पर सत्य की विजय पताका लहराई।
  • ब्रह्म हत्या का पाप: एक अन्य कथा के अनुसार, रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या के पाप से बचने के लिए भगवान राम ने जब लक्ष्मण के साथ महादेव भोलेनाथ की पूजा की, तब शिव जी ने उन्हें नीलकंठ रूप में ही दर्शन दिए थे।
  • कार्य सिद्धि: तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करके अगर किसी काम के लिए निकला जाए, तो वह निश्चित ही सिद्ध और सफल होता है।
  • रामचरित मानस: गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है कि भगवान राम की बारात निकलते समय चारों तरफ शकुन हो रहे थे, जिसमें नीलकंठ पक्षी बायीं ओर दाना चुग रहा था, जिसे शुभ कार्य के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया।

दर्शन के समय जपने वाला मंत्र

नीलकंठ पक्षी के दर्शन पर भक्त पारंपरिक रूप से इस मंत्र का जाप करते हैं:

कृत्वा नीराजनं राजा बालवृद्धयं यता बलम्,

शोभनम खंजनं पश्येज्जलगोगोष्ठसंनिघौ।

नीलग्रीव शुभग्रीव सर्वकामफलप्रद,

पृथ्वियामवतीर्णोसि खञ्जरीट नमोस्तुते।

दशहरा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल दशहरा/विजयादशमी का पर्व 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।

  • दशमी तिथि प्रारंभ: 01 अक्टूबर 2025, शाम 07:01 बजे से
  • दशमी तिथि समाप्त: 02 अक्टूबर 2025, शाम 07:10 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:09 बजे से 02:56 बजे तक।
  • रावण दहन: दशमी तिथि के समाप्त होने तक प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में किया जा सकेगा।

दशहरा हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, और इस दिन नीलकंठ का दिखना सौभाग्य वृद्धि, मनवांछित लाभ और सुखमय वैवाहिक जीवन का योग बनाता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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