Raipur Municipal Corporation TNC Scam: रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ का ‘फाइल गायब’ घोटाला: कमिश्नर को पता ही नहीं और पास हो गया नक्शा, अब जांच कमेटी करेगी खुलासा

Raipur Municipal Corporation TNC Scam: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रायपुर नगर निगम में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप लगा है। मामला इतना गंभीर है कि नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने आनन-फानन में चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। आरोप है कि अफसरों और बिल्डरों ने मिलकर नियमों को ताक पर रखा और जब मामला खुला तो सबूत मिटाने के लिए मूल फाइलें ही गायब कर दी गईं।

भ्रष्टाचार की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित

नगर निगम आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर आयुक्त पंकज शर्मा की अध्यक्षता में जांच दल बनाया है। इस टीम में नगर निवेश विभाग के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वे फाइल पास करने की पूरी प्रक्रिया, गायब हुए दस्तावेजों और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच करें। इस आदेश के बाद निगम के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि जांच की आंच कई बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकती है।

कैसे हुआ 100 करोड़ का बड़ा खेल?

यह पूरा घोटाला अवैध कॉलोनियों को कागजों पर वैध करने के खेल से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि बोरियाखुर्द, ओम नगर और साई नगर जैसे इलाकों के करीब 70 से अधिक खसरा नंबरों के लिए अवैध तरीके से अप्रूवल लिया गया। बिल्डरों और दलालों ने अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी फाइल तैयार की और बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के उसे आगे बढ़ा दिया। नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश है जिसमें राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।

कमिश्नर को किया बायपास, सीधे TNC पहुंची फाइलें

नियम के मुताबिक, किसी भी निर्माण या मार्ग संरचना के अप्रूवल की फाइल जोन कार्यालय से मुख्य मुख्यालय आती है, जहां कमिश्नर की मंजूरी के बाद उसे TNC विभाग भेजा जाता है। लेकिन इस मामले में शातिराना तरीके से जोन क्रमांक 10 से फाइल सीधे TNC विभाग भेज दी गई। निगम कमिश्नर को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी गई। जब TNC से फाइल वापस कमिश्नर के पास अंतिम हस्ताक्षर के लिए आई, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

पकड़े जाने के डर से गायब कर दी गईं मूल फाइलें

जब नगर निगम कमिश्नर ने बिना अपनी मंजूरी के आई फाइलों पर सवाल उठाए और जोन कार्यालय से मूल रिकॉर्ड (नस्ती) मंगवाया, तो जवाब मिला कि फाइलें गायब हो गई हैं। जोन आयुक्त ने लिखित में स्वीकार किया है कि मूल दस्तावेज कार्यालय में नहीं मिल रहे हैं। दस्तावेजों का इस तरह गायब होना इस बात की पुष्टि करता है कि घोटाले को छिपाने के लिए सबूतों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है।

इन इलाकों के भूखंड बने घोटाले का केंद्र

यह विवाद मुख्य रूप से वार्ड क्रमांक 54 के अंतर्गत आने वाले आरडीए कॉलोनी से लगे क्षेत्रों का है। इसमें बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर के खसरा नंबर 81 से लेकर 450 तक के भूखंड शामिल हैं। आरोप है कि इन प्राइम लोकेशन की जमीनों पर अवैध निर्माण और लेआउट को सरकारी अमले की मिलीभगत से ‘वैध’ करने का प्रयास किया गया। दलालों और बिल्डरों के इस गठजोड़ ने निगम के खजाने को करोड़ों की चपत लगाई है।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई, रिपोर्ट का इंतजार

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई जा सकती है। फिलहाल शहर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतने सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी दफ्तर से 70 से ज्यादा फाइलें आखिर रातों-रात कैसे गायब हो गईं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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