
ITBP Jawan Khilesh Kumar Dhruv: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम शंकरदाह में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 32 वर्षीय जवान खिलेश कुमार ध्रुव का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कर्तव्य के दौरान अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने से हुए निधन के बाद जब उनका पार्थिव शरीर गृहग्राम पहुंचा, तो पूरे गांव में मातम छा गया। आईटीबीपी और पुलिस बल की टुकड़ी ने अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी।
ड्यूटी से लौटते वक्त अचानक बिगड़ी थी तबीयत
32 वर्षीय खिलेश कुमार ध्रुव वर्ष 2013-14 में आईटीबीपी में भर्ती हुए थे। हाल ही में वे छत्तीसगढ़ के अति-संवेदनशील नक्सल प्रभावित नारायणपुर क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के बाद गुवाहाटी (असम) स्थित अपनी यूनिट में लौट रहे थे। यात्रा के दौरान ही अचानक उनका स्वास्थ्य खराब हो गया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

अर्जुनी मोड़ से शंकरदाह तक निकाली गई विशाल तिरंगा यात्रा
जवान का पार्थिव शरीर धमतरी पहुंचते ही स्थानीय युवाओं ने एक विशाल बाइक और पैदल तिरंगा यात्रा निकाली। यह यात्रा अर्जुनी मोड़ से शुरू होकर शंकरदाह गांव तक गई। यात्रा के दौरान युवाओं का हुजूम राष्ट्रीय ध्वज थामे सेना के सम्मान में नारेबाजी करता रहा। पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए थे।

“जब तक सूरज-चांद रहेगा, खिलेश तेरा नाम रहेगा” नारों से गूंजा गांव
शवयात्रा के दौरान पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों और युवाओं ने “भारत माता की जय”, “वीर जवान अमर रहे” और “जब तक सूरज-चांद रहेगा, खिलेश तेरा नाम रहेगा” जैसे गगनभेदी नारे लगाए। गांव की सड़कों पर जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर शहीद जवान को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
आईटीबीपी और पुलिस की टुकड़ी ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
अंतिम संस्कार की रस्मों से पूर्व आईटीबीपी और जिला पुलिस बल की संयुक्त टुकड़ी ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शस्त्र झुकाकर अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान मातमी धुन बजाई गई और हवा में गोलियां दागकर अंतिम सलामी दी गई। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार परिजनों ने उन्हें मुखाग्नि दी। बारिश के बीच हुए इस घटनाक्रम में वहां मौजूद हर नागरिक की आंखें नम थीं।

परिजनों और ग्रामीणों ने याद किया जवान का सौम्य स्वभाव
परिवार के सदस्यों और गांव के बुजुर्गों ने बताया कि खिलेश बचपन से ही बेहद शांत, अनुशासित और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके चाचा शिव चरण नेताम ने कहा कि परिवार को अपने बेटे पर गर्व है जिसने देश की सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। वहीं स्थानीय ग्रामीण अमृत लाल ध्रुव ने कहा कि खिलेश का असमय चले जाना पूरे गांव के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा और शवदाह कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। धमतरी के स्थानीय विधायक ओंकार साहू, पंडित राजेश शर्मा, महेंद्र पंडित, मोनिका देवांगन, खूब लाल ध्रुव, राजीव सिन्हा, गांव की सरपंच रमी गौतम और उपसरपंच विनोद डिंडोलकर समेत अर्जुनी थाना प्रभारी चंद्रकांत साहू ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर जवान को अपनी श्रद्धांजलि दी।

पूरे क्षेत्र में शोक की लहर, परिजनों को बंधाया गया ढांढस
इस दुखद घटना के बाद केवल शंकरदाह ही नहीं बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है। जवान अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अंतिम संस्कार के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया। शासन और प्रशासन की ओर से नियमानुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।



