
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चंद्राकर की करीब 1700 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। जब्त की गई संपत्तियों में भारत के साथ-साथ विदेशों में निवेश किए गए करोड़ों रुपये शामिल हैं। ईडी की रायपुर जोनल ऑफिस ने 24 मार्च को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट की कमर टूटती नजर आ रही है।
सट्टे की काली कमाई से दुबई में खड़ा किया साम्राज्य
सौरभ चंद्राकर ने सट्टेबाजी से होने वाली अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा दुबई के रियल एस्टेट मार्केट में निवेश किया था। ईडी द्वारा जब्त की गई 18 विदेशी संपत्तियां दुबई के सबसे महंगे और पॉश इलाकों में स्थित हैं। इसमें दुनिया की सबसे ऊंची इमारत ‘बुर्ज खलीफा’ के लग्जरी अपार्टमेंट के साथ-साथ दुबई हिल्स एस्टेट, बिजनेस बे और एसएलएस होटल एंड रेजिडेंस जैसे प्राइम लोकेशन्स पर स्थित विला और फ्लैट्स शामिल हैं। ये संपत्तियां न केवल सौरभ के नाम पर थीं, बल्कि उसके करीबियों और सहयोगियों जैसे विकास छपारिया और रोहित गुलाटी के जरिए नियंत्रित की जा रही थीं।
फर्जी खातों और हवाला के जरिए देश से बाहर भेजा पैसा
जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऐप के जरिए होने वाली कमाई को सफेद करने के लिए प्रमोटरों ने ‘म्यूल्स’ यानी बिचौलियों का सहारा लिया। हजारों ऐसे बैंक खाते खोले गए जो आम लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखे से बनाए गए थे। इन खातों के जरिए पैसे को घुमाया गया और फिर हवाला चैनलों व क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भारत से बाहर भेजा गया। सिंडिकेट के प्रमोटर कुल मुनाफे का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा खुद रख लेते थे और बाकी हिस्सा उन ऑपरेटरों को दिया जाता था जो जमीनी स्तर पर सट्टे के पैनल चलाते थे।
अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट: टाइगर एक्सचेंज से लेजर-247 तक फैला जाल
महादेव ऑनलाइन बुक केवल एक ऐप तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक विशाल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा था। यह नेटवर्क ‘टाइगर एक्सचेंज’, ‘गोल्ड365’ और ‘लेजर-247’ जैसे कई डोमेन नामों के जरिए अवैध सट्टेबाजी का धंधा चला रहा था। इस पूरे ऑपरेशन को दुबई में बैठकर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल नियंत्रित करते थे। उन्होंने पूरे भारत में एक फ्रेंचाइजी मॉडल तैयार किया था, जिसमें स्थानीय सहयोगियों को ‘पैनल’ दिए गए थे। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों की पुलिस ने इस सिंडिकेट के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध सट्टेबाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
175 ठिकानों पर छापेमारी और 13 गिरफ्तारियां
ईडी इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए अब तक देश भर में 175 से ज्यादा स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है। इस कार्रवाई के दौरान अब तक 13 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और शुभम सोनी जैसे मुख्य किरदारों को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। आज की स्थिति में इस पूरे मामले में जब्त की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 4336 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका और आगे की कार्रवाई
इस घोटाले के तार केवल सट्टेबाजों तक ही नहीं, बल्कि कुछ सरकारी अधिकारियों तक भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। कई एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं, जो इस ओर इशारा करती हैं कि सिस्टम के भीतर से भी इस अवैध धंधे को संरक्षण मिल रहा था। ईडी का कहना है कि उनकी जांच अभी जारी है और ‘अपराध से प्राप्त धन’ (Proceeds of Crime) का पता लगाने के लिए डिजिटल सबूतों और बैंक ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की जब्ती संभव है।
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