पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, हत्या के 6 महीने बाद PWD के 5 अफसर गिरफ्तार

Mukesh Chandrakar Murder Case Update: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के मामले ने अब तगड़ा मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस हत्याकांड में लोक निर्माण विभाग (PWD) के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें दो रिटायर्ड एक्सईएन, एक वर्तमान एक्सईएन, एक एसडीओ और एक सब-इंजीनियर शामिल हैं।

CG PWD Corruption: इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार छुपाने और पत्रकार को चुप कराने के लिए साजिश रची। अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही इस गिरफ्तारी ने विभागीय मिलीभगत की परतें खोलकर रख दी हैं।

घटिया सड़क निर्माण और रिपोर्टिंग बनी मौत की वजह

CG Journalist Murder: मुकेश चंद्राकर ने बीजापुर में चल रहे घटिया सड़क निर्माण और ठेकेदारों की मनमानी को कई बार उजागर किया था। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने निजी प्लेटफॉर्म पर वीडियो रिपोर्ट के ज़रिए PWD में चल रहे भ्रष्टाचार को सामने लाया।

Bijapur News: इससे नाराज़ होकर ठेकेदार सुरेश चंद्राकर — जो मुकेश का रिश्तेदार भी था — ने पत्रकार की हत्या की साजिश रची। जांच में पता चला कि ये साजिश अकेले ठेकेदार ने नहीं, बल्कि PWD अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दी गई।

सेप्टिक टैंक में मिला था शव, अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी

Mukesh Chandrakar Hatyakand: मुकेश 1 जनवरी 2025 को अचानक लापता हो गए थे। दो दिन बाद 3 जनवरी को उनका शव एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। पुलिस ने ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। पूछताछ में धीरे-धीरे पूरे मामले की परतें खुलीं। अब जाकर पुलिस ने पक्के सबूतों के आधार पर PWD के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। सभी को कोर्ट में पेश कर दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। बीजापुर एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ ठोस तकनीकी और डिजिटल सबूत मिले हैं। साथ ही राज्य के डिप्टी सीएम और PWD मंत्री अरुण साव के निर्देश पर यह कार्रवाई तेज़ की गई।

सवालों के घेरे में प्रशासन, उठी जवाबदेही तय करने की मांग

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक सिस्टम और विभागीय जवाबदेही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल ये उठ रहा है कि आखिर कैसे एक पत्रकार की हत्या की साजिश में सरकारी अफसर सीधे तौर पर शामिल हो सकते हैं?

अब जबकि गिरफ़्तारियाँ हो चुकी हैं, PWD के भीतर की गंदगी और भ्रष्ट गठजोड़ उजागर हो चुका है। मामले में और भी अफसरों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जो सच के लिए लड़े, उन्हीं को चुप कराने की कोशिश

Mukesh Chandrakar Murder Case: मुकेश चंद्राकर उन पत्रकारों में से थे जो बिना डरे, बिना झुके जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करते थे। नक्सल प्रभावित इलाके में रहते हुए भी उन्होंने बार-बार सरकारी भ्रष्टाचार को सामने लाने का काम किया। उनकी रिपोर्टिंग के चलते जो सच सामने आया, उसने अब पूरे सिस्टम की नींव हिला दी है। हालांकि ये बहुत दर्दनाक है कि एक ईमानदार पत्रकार को अपने साहस की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी।

प्रशासन की ओर से PWD विभाग के ठेकेदार और इंजीनियरों की जांच जारी है। यह भी देखा जा रहा है कि और कौन-कौन इस साजिश में शामिल था। सवाल ये भी है कि क्या सरकार अब पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी? फिलहाल तो एक साहसी पत्रकार की शहादत ने वो सच्चाई उजागर कर दी है, जिसे सालों से दबाया जा रहा था।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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