
Bakri Palan Yojna: छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बकरी पालन अब ग्रामीण आजीविका का मजबूत साधन बन गया है। राज्य सरकार भी किसानों और बेरोजगार युवाओं को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इन्हीं योजनाओं में से एक है ‘राज्य बकरी उद्यमिता विकास योजना’, जिसे पशुधन विकास विभाग द्वारा लागू किया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और किसानों की आय बढ़ाना है।
योजना के तहत क्या मिलता है
इस योजना के तहत लाभार्थी को कुल 1.50 लाख रुपए की लागत पर 13 बकरियां और 2 बकरे दिए जाते हैं। इच्छुक व्यक्ति बैंक ऋण के माध्यम से भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना का संचालन पशुधन विकास विभाग द्वारा किया जाता है, जिससे पशुपालन के क्षेत्र में नए लोगों को भी अवसर मिल सके।
सब्सिडी और पात्रता की शर्तें
योजना का लाभ सभी वर्गों के लोगों को मिल सकता है। सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियों को 25 प्रतिशत सब्सिडी, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति के हितग्राहियों को 33 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति को विभागीय फार्म में आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ आधार कार्ड और बैंक पासबुक की प्रति संलग्न करना जरूरी है। विभाग सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से पूरी करता है ताकि पात्र व्यक्ति को समय पर लाभ मिल सके।

बकरी पालन से कमाई का अनुमान
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में बकरी के मांस की मांग 700 से 800 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। अगर कोई किसान एक वर्ष तक योजना के तहत बकरी पालन करता है, तो उसकी बकरियों की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है। इस तरह एक पालक को सालाना करीब 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। यह काम खेती के साथ-साथ करने में भी आसान है और कम जगह में शुरू किया जा सकता है। इस योजना का लाभ उठाने या आवेदन करने के लिए अपने नजदीकी पशु औषधालय केंद्र या जिला पशु पालन विभाग में संपर्क कर सकते है।
ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए नया रोजगार
बकरी पालन अब ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया जरिया बन गया है। राज्य बकरी उद्यमिता विकास योजना से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है। कम लागत और अधिक लाभ वाले इस व्यवसाय के जरिए लोग धीरे-धीरे आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
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