
बिलासपुर हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पति की तलाक की अपील को मंजूर कर लिया है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए के प्रसाद की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी का पति को शारीरिक संबंध बनाने से रोकना और 11 साल लंबा अलगाव मानसिक क्रूरता माना जाएगा। कोर्ट ने माना कि इतने लंबे समय से अलग रहना और पत्नी की वैवाहिक संबंधों में अनिच्छा वैवाहिक जीवन के लिए हानिकारक है।
शादी के एक महीने बाद ही पत्नी मायके चली गई, 11 साल का अलगाव
यह मामला अंबिकापुर के रहने वाले 45 वर्षीय पति से जुड़ा है, जिसकी शादी मई 2009 में हुई थी। पति का आरोप है कि शादी के सिर्फ एक महीने बाद ही उसकी पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई। 2013 में पत्नी कुछ दिनों के लिए अंबिकापुर में साथ रही, लेकिन उसने शारीरिक संबंध बनाने से लगातार मना किया और धमकी भी दी। पत्नी मई 2014 से लगातार मायके में रह रही है और पति के लगातार प्रयासों के बावजूद वापस नहीं लौटी, न ही उसने परिवार के किसी खुशी या दुख में भागीदारी की।
पत्नी का पलटवार: पति योग साधना में लीन, नहीं थी वैवाहिक रुचि
जहाँ पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की, वहीं पत्नी ने आरोपों को निराधार बताया। पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति एक साध्वी के भक्त हैं और योग साधना में लीन रहने के कारण वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं रखते थे। पत्नी ने यह भी कहा कि पति बच्चे नहीं चाहते थे और उन पर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। हालांकि, पत्नी ने पहले वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अर्जी लगाई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया।
हाईकोर्ट ने स्वीकार की अलगाव की क्रूरता, फैमिली कोर्ट का फैसला खारिज
दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैमिली कोर्ट ने पहले पति की अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के बयान और रिकॉर्ड को देखते हुए पाया कि पति-पत्नी 11 साल से अलग रह रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने क्रॉस एग्जामिनेशन में खुद स्वीकार किया कि वह अब पति के साथ वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहती। इसलिए लंबे अलगाव को मानसिक क्रूरता मानते हुए डिवीजन बेंच ने पति की तलाक की अपील को स्वीकार कर लिया।
तलाक मंजूर, पति को ₹20 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश
हाईकोर्ट ने पति की तलाक की अपील को मंजूर करने के साथ ही, उसे अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पति को अपनी पत्नी को दो महीने के अंदर ₹20 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देना होगा। इस फैसले से वैवाहिक संबंधों में शारीरिक संबंध बनाने से इनकार और लंबे अलगाव को मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखे जाने की कानूनी स्थिति और मजबूत हुई है।



