
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष और 2023 विधानसभा चुनाव में बेलतरा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी का नाम इस बार बिलासपुर की मतदाता सूची में जुड़ने के बजाय गलत तरीके से भिलाई में मैप कर दिया गया है। यह लापरवाही तब सामने आई है जब वे कई दशकों से बिलासपुर में ही रह रहे हैं और उनका पूरा राजनीतिक जीवन इसी शहर से जुड़ा हुआ है।
परिवार बिलासपुर में, मगर नाम भिलाई की सूची में
कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे विजय केशरवानी का नाम 2003 से ही बिलासपुर की मतदाता सूची में दर्ज रहा है। आज भी उनके परिवार के सात से आठ सदस्य नर्मदा नगर वार्ड क्रमांक 17 में स्थानीय वोटर लिस्ट में शामिल हैं। लेकिन विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उनका नाम बिलासपुर के बजाय भिलाई में दर्ज दिखाया जा रहा है। यह विसंगति न केवल प्रशासनिक चूक को उजागर करती है, बल्कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की गंभीरता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
विजय केशरवानी का सवाल: मेरा भिलाई से कोई संबंध नहीं, फिर नाम कैसे?
विजय केशरवानी ने बताया कि उन्होंने अपने दस्तावेज, फॉर्म और सत्यापन संबंधी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया था। जिला निर्वाचन कार्यालय से लगातार संपर्क के बाद उन्हें यह जानकारी मिली कि उनकी प्रविष्टि गलती से भिलाई में चली गई है। उन्होंने कहा, “बिलासपुर से मेरा न केवल पारिवारिक बल्कि राजनीतिक जीवन भी गहराई से जुड़ा है… भिलाई से तो मेरा कोई संबंध ही नहीं। फिर मेरा नाम वहां कैसे दर्ज हो गया, यह मेरे लिए भी सवाल है।**”
कांग्रेस ने पुनरीक्षण अभियान की विश्वसनीयता पर जताई आपत्ति
कांग्रेस ने विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान पहले ही जिला निर्वाचन कार्यालय को कई समस्याएं और शिकायतें बताई थीं। चुनाव आयोग की ओर से यह भरोसा दिया गया था कि कोई भी मतदाता कठिनाई में सीधे संपर्क कर सकता है और तत्काल सहायता दी जाएगी। इसके बावजूद एक वरिष्ठ और सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति का नाम गलत स्थान पर दर्ज होना यह दर्शाता है कि पुनरीक्षण में तकनीकी और प्रशासनिक कमियां अब भी दूर नहीं हुई हैं।
डेटा एंट्री और मैपिंग में लापरवाही बरकरार
चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए समय की कमी को देखते हुए एक सप्ताह का विस्तार भी दिया था। लेकिन विजय केशरवानी का प्रकरण यह साबित करता है कि ग्राउंड लेवल पर डेटा एंट्री और मैपिंग में लापरवाही अब भी बरकरार है। यह मामला पुनरीक्षण अभियान की पारदर्शिता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर रहा है, विशेषकर तब जब दशकों से जिले में रहने वाले व्यक्तियों के नाम तक सही तरीके से अपडेट नहीं किए जा रहे हों।



