सुकमा के जंगलों में नक्सलियों की गन फैक्ट्री खाक, सुरक्षाबलों ने बरामद किया हथियारों का जखीरा

नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। दुर्गम पहाड़ी और घने जंगलों के बीच चल रही नक्सलियों की अवैध ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को जवानों ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। यह कार्रवाई नक्सलियों के सप्लाई नेटवर्क और उनकी युद्धक क्षमता पर एक गहरा प्रहार माना जा रहा है। सुरक्षाबलों की 150वीं बटालियन और जिला पुलिस बल की संयुक्त टीम ने मीनागट्टा के जंगलों में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। खुफिया जानकारी के आधार पर जब जवानों ने इलाके की घेराबंदी की, तो वहां हथियार बनाने का पूरा ढांचा मिला जिसे तुरंत निष्क्रिय कर दिया गया।

जंगल के भीतर मशीनें और बारूद, फैक्ट्री से बरामद सामानों की सूची

कार्रवाई के दौरान मौके से इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक और उपकरण मिले हैं कि अधिकारी भी हैरान रह गए। नक्सली यहां न केवल हथियार बना रहे थे बल्कि उन्हें सुधारने और विस्फोटक तैयार करने का काम भी बड़े पैमाने पर कर रहे थे। बरामद सामानों की मुख्य सूची इस प्रकार है:

  • 8 नग सिंगल शॉट राइफल और 12 बोर के 15 जिंदा कारतूस
  • 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और 30 मीटर बिजली के तार
  • 2 किलो पीईके और 1 किलो विशेष विस्फोटक सामग्री
  • 10 किलो अमोनियम नाइट्रेट और 8 वायरलेस संचार सेट
  • वेल्डिंग मशीन, कटर मशीन, मल्टीमीटर और बंदूक के पुर्जे
  • नक्सली वर्दी और भारी मात्रा में कपड़े सिलने का सामान

हथियार सप्लाई नेटवर्क टूटा, बैकफुट पर माओवादी संगठन

जांच में यह बात सामने आई है कि इस फैक्ट्री के जरिए नक्सली अपने छोटे दस्तों को हथियार और बारूदी सुरंग के सामान सप्लाई करते थे। सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि इस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से नक्सलियों की रसद और हथियार आपूर्ति की कड़ी टूट गई है। घने जंगल का फायदा उठाकर नक्सली यहां लंबे समय से सुरक्षित ठिकाना बनाए हुए थे। सुरक्षाबलों की इस सीधी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब नक्सलियों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में भी उनकी पकड़ ढीली पड़ती जा रही है।

दबाव में नक्सली नेटवर्क, सरेंडर और गिरफ्तारी के आंकड़े दे रहे गवाही

सफलता का अंदाजा पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। सुकमा जिले में पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहा है। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में बड़े बदलाव दिख रहे हैं:

  • साल 2024 से अब तक कुल 599 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण किया है।
  • विभिन्न अभियानों के तहत 460 माओवादियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
  • मुठभेड़ों के दौरान अब तक 71 नक्सली मारे जा चुके हैं।
  • सैकड़ों की संख्या में आधुनिक हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं।

मुख्यधारा में लौटने की अपील, हिंसा छोड़ने का दिया मौका

विकास और शांति की अपील करते हुए पुलिस अधीक्षक ने नक्सलियों को चेतावनी के साथ एक रास्ता भी सुझाया है। उन्होंने कहा कि हिंसा की राह पर चलने वालों का अंत निश्चित है, इसलिए बेहतर यही है कि वे ‘पूना मार्गेम’ (नया रास्ता) अभियान का लाभ उठाएं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में फिर से सम्मानजनक जीवन जीने का मौका दिया जा रहा है। पुलिस ने साफ किया है कि जब तक क्षेत्र से माओवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक तलाशी अभियान और ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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