
रायपुर: बालोद जिले में आयोजित हो रही ‘राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी’ के टेंडर को लेकर मचे घमासान पर राज्य सरकार ने अपना बचाव किया है। 10 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम बजट के खर्च पर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन ने नया तर्क पेश किया है। सरकार का कहना है कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय इकाई का ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसी तकनीकी कारण की वजह से जेम के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। सरकार के मुताबिक, आयोजन की व्यवस्थाओं में देरी न हो, इसलिए टेंडर के बजाय एक विशेष समिति के माध्यम से कामों की स्वीकृति दी जा रही है। बता दें कि इस 4 दिवसीय आयोजन में होने वाले खर्च को लेकर विपक्षी दल और कई संगठन शुरुआती दिन से ही गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं।
कलेक्टर की निगरानी में बनी 9 सदस्यीय समिति: अपर कलेक्टर संभाल रहे हैं कमान, जिला शिक्षा अधिकारी को बनाया गया है सचिव
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के दावों को पुख्ता करने के लिए सरकार ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए बालोद कलेक्टर ने एक उच्च स्तरीय क्रय समिति गठित की है। इस 9 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष अपर कलेक्टर (एडीएम) हैं, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी इसमें सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का कहना है कि जंबूरी जैसे बड़े आयोजन के लिए 26 नवंबर को ही उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया था कि नेशनल बॉडी की जेम आईडी न होने से टेंडर में तकनीकी अड़चन आ रही है। इसके बाद ही बालोद जिला प्रशासन को व्यवस्थाओं के लिए अधिकृत किया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री ने भी पहले कहा था कि यह एक वार्षिक कैलेंडर का हिस्सा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी या वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश नहीं है।
10 करोड़ का बजट और 12 हजार मेहमान: सफाई से संतुष्ट नहीं विरोधी, पुरानी संस्था के रजिस्ट्रेशन न होने पर उठे सवाल
बालोद के दुहली में 9 से 13 जनवरी तक चलने वाले इस महाकुंभ में देशभर के करीब 12 हजार रोवर-रेंजर और विदेशी मेहमान हिस्सा ले रहे हैं। इनके आवास, भोजन और बिजली-पानी की व्यवस्था के लिए शासन ने 10 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जिसमें से 5 करोड़ की राशि पहले ही जारी हो चुकी है। हालांकि, सरकार की इस सफाई ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स साल 1969 से काम कर रही एक प्रतिष्ठित संस्था है, जो हर साल करोड़ों के आयोजन करती है। ऐसे में यह सवाल जस का तस है कि इतनी पुरानी संस्था का अब तक सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं है और क्या हर बार नियमों को इसी तरह शिथिल किया जाता है?




