“साहब, मैं जिंदा हूं… बस मेरा धान बिकवा दीजिए”: सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ किसान कलेक्ट्रेट पहुंचा, सच सामने आते ही मचा हड़कंप

Balodabazar: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी सरकारी मशीनरी को सकते में डाल दिया है। भाटापारा ब्लॉक के करही बाजार गांव के रहने वाले किसान पंचराम यदु शुक्रवार को कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंचे, लेकिन उनकी मांग कर्ज या खाद की नहीं थी। वे हाथ जोड़कर अधिकारियों से बस इतना कह रहे थे कि “साहब, मैं जिंदा हूं, मेरा टोकन कटवा दीजिए।” दरअसल, सरकारी दस्तावेजों और आधार पोर्टल पर पंचराम को मृत घोषित कर दिया गया है। इस तकनीकी गलती की वजह से उनके जीवन भर की मेहनत यानी धान की फसल अब बिकने की दहलीज पर आकर अटक गई है।

आधार कार्ड निष्क्रिय होने से ‘एग्रीस्टेक’ पोर्टल ने फेरा मुंह

किसान पंचराम की मुसीबत तब शुरू हुई जब वे अपनी उपज बेचने के लिए समिति में टोकन कटवाने पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि उनका आधार कार्ड निष्क्रिय कर दिया गया है क्योंकि रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी मृत्यु हो चुकी है। आधार पोर्टल पर ‘मृत’ दर्ज होने के कारण उनका रजिस्ट्रेशन नए ‘एग्रीस्टेक’ पोर्टल पर नहीं हो पा रहा है। बिना पंजीयन के समिति टोकन जारी नहीं कर सकती। अपनी आंखों के सामने अपनी फसल को खराब होते देख मजबूर किसान अब खुद के जिंदा होने का सबूत लेकर सरकारी दफ्तरों की चौखट नाप रहा है।

130 क्विंटल धान और साल भर की उम्मीदें दांव पर

पंचराम यदु हर साल लगभग 130 क्विंटल धान सरकारी समिति में बेचते हैं। इसी कमाई से उनके पूरे परिवार का गुजारा और अगली फसल की तैयारी होती है। उन्होंने बताया कि इस बार टोकन न कटने की वजह से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। तहसील कार्यालय के चक्कर काटने के बाद जब कोई रास्ता नहीं निकला, तो वे जिला मुख्यालय पहुंचे। उनका कहना है कि अगर समय रहते कागजों में सुधार नहीं हुआ, तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और वे कर्ज के जाल में फंस जाएंगे।

सिस्टम की लापरवाही और किसान की बेबसी

यह मामला केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। बिना किसी पुख्ता जांच या जानकारी के एक जीवित व्यक्ति को रिकॉर्ड में मृत कैसे दिखा दिया गया, यह बड़ा सवाल है। किसान अब अपनी ही पहचान साबित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। पंचराम का कहना है कि जब वे अधिकारियों के सामने खड़े हैं, तब भी उन्हें दस्तावेजों के जरिए खुद के अस्तित्व का प्रमाण देना पड़ रहा है। यह स्थिति सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाती है, जहां कागजी सबूत इंसान की मौजूदगी से ज्यादा भारी पड़ रहे हैं।

जांच के बाद सुधार का मिला आश्वासन

इस पूरे मामले पर जिला खाद्य अधिकारी पुनीत वर्मा का कहना है कि आधार कार्ड के सक्रिय न होने की वजह से पोर्टल पर ऐसी तकनीकी दिक्कतें आती हैं। उन्होंने बताया कि मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। किसान के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और संबंधित पोर्टल के माध्यम से डेटा में सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होते ही किसान का आधार सक्रिय कर धान खरीदी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा ताकि उनकी फसल की बिक्री सुनिश्चित हो सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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