
अगर आप छत्तीसगढ़ में घर बनाने के लिए जमीन या निवेश के लिए प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो थोड़ा इंतजार करना आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है। प्रदेश सरकार जमीनों की सरकारी गाइडलाइन दरों में बड़ी कटौती करने की तैयारी में है। वर्तमान में लागू दरों के कारण कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें अचानक 8 से 10 गुना तक बढ़ गई थीं जिससे आम आदमी की पहुंच से जमीन दूर हो गई थी। जनता की परेशानी को देखते हुए अब सरकार जमीनों का दोबारा मूल्यांकन करवा रही है ताकि आम लोगों को राहत दी जा सके।
बाजार मूल्य और सरकारी दरों में होगा तालमेल: जिला पंजीयकों की टीमें कर रहीं नया मूल्यांकन
प्रदेश के कई हिस्सों में सरकारी रेट और बाजार के वास्तविक मूल्य में भारी अंतर देखने को मिल रहा था। इसी विसंगति को दूर करने के लिए जिला पंजीयकों की विशेष टीमें मैदान में उतरी हैं। यह टीमें जमीनों का नए सिरे से सर्वे और मूल्यांकन कर रही हैं। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी दरों को तार्किक बनाना है ताकि लोगों को रजिस्ट्री कराते समय भारी भरकम अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े। माना जा रहा है कि इस पुनर्मूल्यांकन के बाद प्रॉपर्टी की कीमतें काफी हद तक स्थिर और कम हो जाएंगी।
दावा-आपत्तियों का निपटारा अंतिम चरण में: 10 फरवरी तक नई दरें लागू होने के आसार
महानिरीक्षक पंजीयन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर से नई दरों को लेकर 2000 से ज्यादा दावे और आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इतना ही नहीं करीब 100 से अधिक मामले अदालतों तक भी पहुंच गए थे। वर्तमान में विभाग इन सभी आपत्तियों के निराकरण के काम को अंतिम रूप देने में जुटा है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक अचल संपत्तियों के पुनरीक्षण का काम पूरा होते ही नई गाइडलाइन दरों को कैबिनेट से मंजूरी मिल जाएगी। पूरी संभावना है कि 10 फरवरी से पहले नई दरें प्रदेश भर में प्रभावी हो जाएंगी।
नियमों के उल्लंघन पर मची थी रार: 7 प्रतिशत के बजाय 10 गुना तक बढ़ा दी गई थी कीमतें
भारतीय स्टाम्प अधिनियम के नियमों के अनुसार किसी भी अचल संपत्ति की कीमत में एक बार में अधिकतम 7 प्रतिशत तक की ही वृद्धि की जा सकती है। हालांकि 20 नवंबर 2025 को जारी हुई पिछली गाइडलाइन में दरों को 20 प्रतिशत से लेकर 10 गुना तक बढ़ा दिया गया था। सात साल बाद लागू हुई उन नई दरों की वजह से सरकार को जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। इसी नाराजगी को देखते हुए शासन ने 31 दिसंबर 2025 तक दावे और आपत्तियां मंगवाई थीं ताकि नियमों के दायरे में रहकर सुधार किया जा सके।
बजट और रजिस्ट्री पर पड़ेगा सीधा असर: रियल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगी नई जान
प्रॉपर्टी की दरों में सुधार होने से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी बल्कि सुस्त पड़े रियल एस्टेट कारोबार में भी तेजी आने की उम्मीद है। महंगी गाइडलाइन दरों की वजह से बीते कुछ समय से रजिस्ट्रियों की संख्या में कमी आई थी क्योंकि लोग पुरानी दरों या सुधार का इंतजार कर रहे थे। अब नई और सस्ती दरें लागू होने से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और मध्यम वर्ग के लिए अपना आशियाना बनाने का सपना सच हो सकेगा। पंजीयन विभाग को भी उम्मीद है कि दरें कम होने से रजिस्ट्री के मामलों में बढ़ोतरी होगी जिससे राजस्व को भी लाभ मिलेगा।



