
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर संगठन में फेरबदल की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की जगह अब एक नए चेहरे को कमान सौंपने की तैयारी की खबरें आ रही हैं। इस रेस में सबसे आगे पूर्व मंत्री और विधायक उमेश पटेल का नाम उभरकर सामने आया है। ओबीसी वर्ग से आने वाले उमेश पटेल को पार्टी के भीतर एक ऊर्जावान और युवा नेता के तौर पर देखा जाता है। उनकी दावेदारी के पीछे संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति मानी जा रही है।
नंदकुमार पटेल की विरासत और उमेश का कद
उमेश पटेल का राजनीतिक कद उनकी पारिवारिक विरासत से भी जुड़ा है। वे पूर्व गृह मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ शहीद नंदकुमार पटेल के बेटे हैं। उनके बड़े भाई दिनेश पटेल ने भी झीरम घाटी हमले में शहादत दी थी। उमेश न केवल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं, बल्कि वे पहले युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्तमान में उन्हें ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान का प्रदेश समन्वयक बनाकर पार्टी ने उनकी सक्रियता बढ़ा दी है, जिसे अध्यक्ष पद की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल की ‘शतरंज’
सियासी जानकारों का मानना है कि इस नाम के पीछे छत्तीसगढ़ कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी भी एक बड़ा कारण है। चर्चा है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भूपेश बघेल ने उमेश पटेल के नाम का कार्ड खेला है। उमेश पटेल को युवाओं का भारी समर्थन हासिल है और वे पार्टी के भीतर सभी गुटों के लिए स्वीकार्य चेहरा हो सकते हैं। संगठन के भीतर चल रही इस खींचतान ने दिल्ली दरबार तक हलचल पैदा कर दी है।
दीपक बैज का पलटवार और गोलमोल जवाब
अपनी कुर्सी जाने की अटकलों पर वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज ने खुलकर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके बयानों में तल्खी जरूर दिखी। बैज ने चुटकी लेते हुए कहा कि उनके हटने की खबर से भाजपा को सबसे ज्यादा खुशी होगी। उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि वे कांग्रेस की चिंता छोड़ अपने घर की सुध लें। बैज ने यह भी कह दिया कि कांग्रेस के भीतर क्या चल रहा है, उससे ज्यादा चर्चा तो इस बात की है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री बदले जाने वाले हैं।
भाजपा का तंज: आदिवासियों की हितैषी होने का ढोंग
कांग्रेस के भीतर चल रही इस उठापटक पर भाजपा ने भी निशाना साधने में देरी नहीं की। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व की लड़ाई अब सार्वजनिक हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा आदिवासियों के हित की बात करने का दिखावा करती है, लेकिन हकीकत में एक आदिवासी अध्यक्ष (दीपक बैज) को हटाने के लिए पार्टी के ही सारे दिग्गज नेता एक साथ लग गए हैं। सोनी के मुताबिक कांग्रेस पूरी तरह बिखर चुकी है और वहां हर बड़ा नेता दूसरे को किनारे करने की फिराक में है।
हाईकमान के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
फिलहाल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के ज्यादातर नेता इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। उनका एक ही जवाब है कि राष्ट्रीय नेतृत्व जिसे भी जिम्मेदारी सौंपेगा, उसे पूरी निष्ठा से निभाया जाएगा। हालांकि, बंद कमरों में बैठकों का दौर जारी है। ओबीसी कार्ड और युवा चेहरे के मेल के साथ उमेश पटेल की दावेदारी मजबूत दिख रही है, लेकिन अंतिम फैसला सोनिया और राहुल गांधी की मुहर के बाद ही साफ होगा। प्रदेश की राजनीति में आने वाले कुछ दिन काफी अहम होने वाले हैं।



