
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का दो महीने से चला आ रहा लंबा सफर शनिवार को समाप्त हो गया। प्रदेशभर के केंद्रों पर आखिरी दिन भी किसानों की भारी भीड़ देखी गई, जहां देर शाम तक टोकन के आधार पर तौल का काम जारी रहा। अब प्रशासन का पूरा ध्यान खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण और मिलिंग की प्रक्रिया पर है। सरकार का दावा है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया ताकि केवल असली किसानों को ही उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके।
महासमुंद जिले ने बनाया रिकॉर्ड
इस साल धान खरीदी के मामले में महासमुंद जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की निगरानी में यहां के 182 केंद्रों पर रिकॉर्ड 10 लाख 187 मीट्रिक टन धान की आवक हुई। जिले के करीब 1 लाख 48 हजार किसानों ने अपनी उपज बेची, जिसमें मोटा धान और सरना किस्म की प्रमुखता रही। अब तक यहां आधे से ज्यादा धान का डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) जारी हो चुका है और राइस मिलों के जरिए उठाव का काम तेजी से चल रहा है।
अवैध धान और बिचौलियों पर कड़ा प्रहार
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने खरीदी प्रक्रिया के समापन पर कहा कि इस बार सरकार ने भ्रष्टाचार और बिचौलियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए थे। उन्होंने बताया कि पिछले साल की तुलना में कुल खरीदी करीब 10 लाख मीट्रिक टन कम रही है, जिसका मुख्य कारण अवैध धान की आवक को रोकना है। मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय पड़ोसी राज्यों का धान भी खपाया जाता था, लेकिन इस बार सख्ती की वजह से सरकारी खजाने का पैसा बर्बाद होने से बच गया।
सरगुजा और अन्य जिलों के आंकड़े
अंबिकापुर (सरगुजा) जिले में भी धान खरीदी व्यवस्थित ढंग से पूरी हुई। यहां लगभग 51 हजार से अधिक किसानों ने 31 लाख क्विंटल से ज्यादा धान बेचा। शासन ने सुनिश्चित किया है कि किसानों के खातों में समर्थन मूल्य की राशि सीधे ट्रांसफर की जाए। सरगुजा के अलावा बेमेतरा, बलौदाबाजार और बालोद जैसे जिलों में भी खरीदी का ग्राफ काफी ऊंचा रहा, जहां औसतन 7 से 8 लाख मीट्रिक टन के बीच व्यापार हुआ।
जिलों में धान खरीदी की ताजा स्थिति
प्रदेश के प्रमुख जिलों में धान खरीदी का ब्यौरा:
| जिला | खरीदी का आंकड़ा (मीट्रिक टन में) |
| महासमुंद | 10,00,187 |
| बेमेतरा | 8,54,000 |
| बलौदाबाजार | 7,91,000 |
| बालोद | 7,89,000 |
| बिलासपुर | 6,75,000 |
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मिलिंग और उठाव का अगला चरण शुरू
खरीदी पूरी होने के बाद अब प्रशासन की अगली प्राथमिकता केंद्रों से धान का उठाव कर उसे राइस मिलों तक पहुंचाना है। कई जिलों में मिलर्स के साथ अनुबंध और उठाव की प्रक्रिया साथ-साथ चल रही थी। सरकार का लक्ष्य है कि मानसून आने से पहले सभी खुले केंद्रों से धान को गोदामों में शिफ्ट कर दिया जाए। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने भुगतान और बोनस से जुड़ी जानकारी के लिए सहकारी बैंक के संपर्क में रहें।



