
रायपुर में शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बजाय हंसी-मजाक का माहौल देखने को मिला। भाजपा के कद्दावर विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सदन में उपस्थिति को लेकर निशाना साधा। उन्होंने सभापति धरम लाल कौशिक की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि जब बघेल सदन में नहीं होते, तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत काफी स्वतंत्र और सहज नजर आते हैं। चंद्राकर के इस बयान ने सदन में मौजूद सदस्यों का ध्यान खींच लिया और चर्चा की दिशा थोड़ी बदल गई।
नेता प्रतिपक्ष के साथ ‘अन्याय’ का किया दावा
अजय चंद्राकर ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि सदन में भूपेश बघेल की मौजूदगी से नेता प्रतिपक्ष की भूमिका दब जाती है। उन्होंने मजाकिया लहजे में इसे ‘अन्याय’ करार देते हुए कहा कि बघेल के रहते महंत जी आभासी या वर्चुअल जैसे लगने लगते हैं। चंद्राकर का इशारा इस ओर था कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व का प्रभाव सदन की कार्यवाही पर भी दिखता है। उन्होंने दावा किया कि बघेल अक्सर नेता प्रतिपक्ष को दबाने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी स्वतंत्र कार्यशैली प्रभावित होती है।
चरणदास महंत और सभापति का करारा पलटवार
अजय चंद्राकर के इस हमले पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। महंत ने पलटवार करते हुए कहा कि जब सदन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद नहीं होते, तब अजय चंद्राकर भी इसी तरह चहकते नजर आते हैं। इस जुबानी जंग के बीच सभापति धरम लाल कौशिक ने दखल देते हुए स्थिति को संभाला। सभापति ने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष किसी ‘आभासी’ भूमिका में नहीं हैं, बल्कि वे अपना काम काफी मजबूती और बेहतर ढंग से कर रहे हैं।



