
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों ‘कृषक उन्नति योजना’ के बहाने निजी छींटाकशी का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी द्वारा कांग्रेस नेताओं को मिल रही बोनस राशि के आंकड़े सार्वजनिक करने के बाद पूर्व मंत्री अमरजीत भगत बिफर पड़े हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘बहुपत्नीक’ (एक से अधिक पत्नी रखने वाला) तक कह डाला। इस बयान ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है, जिस पर भाजपा नेता एवं विधायक अजय चंद्राकर ने अपने चिर-परिचित अंदाज में पलटवार किया है।
कृषक उन्नति योजना की राशि पर छिड़ा नया विवाद
विवाद की जड़ में साय सरकार की वह योजना है, जिसके तहत धान की अंतर राशि (बोनस) किसानों के खातों में भेजी गई है। बीजेपी ने दावा किया कि इस योजना का लाभ कांग्रेस के बड़े नेताओं और उनके परिवारों को भी मिल रहा है। जब इन नेताओं के नाम और उन्हें मिली राशि के आंकड़े सामने आए, तो कांग्रेस खेमे में नाराजगी फैल गई। बीजेपी इसे ‘बिना भेदभाव का सुशासन’ बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे अपनी मेहनत की कमाई और किसान का अधिकार करार दे रही है।
अमरजीत भगत बोले: ‘भाजपा नेता बहूपत्नीक हो सकते हैं’
आंकड़े सार्वजनिक होने पर पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने तल्ख लहजे में कहा कि सरकार किसी पर कोई एहसान नहीं कर रही है। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि बीजेपी को कांग्रेस नेताओं की पत्नी और बहू का नाम उछालने के बजाय अपने नेताओं के परिवारों की जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए। भगत यहीं नहीं रुके, उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि शायद भाजपा नेता ‘बहुपत्नीक’ हो सकते हैं, इसीलिए वे अपने परिवार के नाम सामने लाने से डर रहे होंगे।
अजय चंद्राकर की खरी-खरी: ‘नाम बताने की परंपरा कांग्रेस ने ही शुरू की’
भगत के आरोपों पर विधायक अजय चंद्राकर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने याद दिलाया कि सार्वजनिक मंचों से आंकड़े और नाम जारी करने की रीत खुद कांग्रेस ने डाली थी। चंद्राकर ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री और मंत्री बार-बार मंचों से नाम लेकर एहसान जताते थे। अब जब वही काम बीजेपी कर रही है और खुद कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, तो उन्हें मिर्ची क्यों लग रही है? उन्होंने कहा कि सच स्वीकार करने का साहस कांग्रेस को दिखाना चाहिए।
चंद्राकर का कड़ा प्रहार:- ‘अमरजीत भगत कोमा में हैं’
अमरजीत भगत की ‘बहुपत्नीक’ वाली टिप्पणी पर अजय चंद्राकर ने बेहद कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अमरजीत भगत इस वक्त ‘कोमा’ में चले गए हैं, इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि कोमा में अक्सर इंसान अकेले में कुछ भी बुदबुदाते रहता है, वर्तमान में पूर्व मंत्री की मानसिक स्थिति भी वैसी ही नजर आ रही है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।
राजनीतिक मर्यादा पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ की राजनीति आमतौर पर शालीन मानी जाती है, लेकिन ‘पत्नी और बहू’ के नाम पर शुरू हुई यह बहस अब व्यक्तिगत स्तर तक गिर गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर शुरू हुई चर्चा का निजी जीवन तक पहुंचना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। बीजेपी जहां इसे पारदर्शिता का हिस्सा बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे निजता का हनन और डराने-धमकाने की राजनीति मान रही है।
लोकसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी तपिश
होली के त्योहार और आगामी लोकसभा चुनाव के ठीक पहले नेताओं के बीच की यह कड़वाहट साफ संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और भी आक्रामक होगा। धान का बोनस छत्तीसगढ़ में हमेशा से बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। बीजेपी इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को ही अपनी योजना का ‘लाभार्थी’ बताकर उनके दावों की हवा निकालने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि ‘कोमा’ और ‘बहुपत्नीक’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल के बाद यह विवाद किस मोड़ पर जाकर थमता है।



