CG BJP Rajya Sabha Election: छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दौड़: आज आ सकती है प्रत्याशियों की सूची, ‘लोकल’ या ‘पैराशूट’ के बीच फंसा पेच

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो भाजपा और न ही कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के पत्तों को खोला है। नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है, और बीच में होली का त्योहार होने के कारण माना जा रहा है कि आज यानी 3 मार्च को दोनों प्रमुख दल अपने अधिकृत नामों का ऐलान कर सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है कि पार्टियां किसी स्थानीय चेहरे पर दांव लगाएंगी या फिर दिल्ली से कोई ‘पैराशूट’ प्रत्याशी उतारा जाएगा।

होली से पहले नाम तय करने की मजबूरी

नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए कम से कम 10 प्रस्तावक और 10 समर्थकों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। 4 मार्च को होली का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहेगा। ऐसे में प्रस्तावक और समर्थकों की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पार्टियों के पास आज का ही दिन सबसे मुफीद है। यदि आज नाम तय हो जाते हैं, तो 5 मार्च को अंतिम समय सीमा से पहले आसानी से नामांकन दाखिल किया जा सकेगा। यही वजह है कि दोनों दलों के प्रदेश मुख्यालयों में हलचल बढ़ गई है।

जातिगत समीकरण साधने की तैयारी

राज्यसभा की इन दो सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जातिगत गणित बैठाने में जुटी हैं। चर्चा है कि भाजपा इस बार एक आदिवासी चेहरे और एक ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) या सामान्य वर्ग के नेता को मौका दे सकती है। वहीं, कांग्रेस में भी किसी प्रभावशाली आदिवासी नेता और एक पिछड़े वर्ग के चेहरे को राज्यसभा भेजने पर गहन मंथन चल रहा है। आगामी चुनाव को देखते हुए दोनों ही पार्टियां सोशल इंजीनियरिंग के जरिए वोट बैंक को साधने की कोशिश करेंगी।

स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा

छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘लोकल’ (स्थानीय) बनाम ‘पैराशूट’ (बाहरी) उम्मीदवार का मुद्दा हमेशा गर्माता रहा है। विपक्षी दल अक्सर बाहरी प्रत्याशियों को मुद्दा बनाकर घेराबंदी करते हैं। इस बार चर्चा है कि दोनों ही पार्टियां इस विवाद से बचना चाहती हैं और छत्तीसगढ़ के ही किसी सक्रिय नेता को प्राथमिकता दे सकती हैं। हालांकि, हाईकमान के हस्तक्षेप की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि कई बार केंद्रीय नेतृत्व अपने किसी करीबी या विशेषज्ञ को राज्यसभा भेजने का फैसला लेता है।

दिल्ली के चक्कर काट रहे दावेदार

जैसे-जैसे घोषणा का समय नजदीक आ रहा है, दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। छत्तीसगढ़ के कई दिग्गज नेता इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि पुराने अनुभवी नेता, जो पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, वे अपनी दावेदारी फिर से मजबूत करने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं, कुछ नए चेहरे भी अपनी सक्रियता और निष्ठा के दम पर आलाकमान को प्रभावित करने की कोशिश में जुटे हैं।

अंतिम फैसले के लिए दिल्ली पर टिकी नजरें

भले ही प्रदेश स्तर पर नामों के पैनल तैयार कर लिए गए हों, लेकिन अंतिम मुहर दिल्ली में ही लगेगी। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति और कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी सभी सियासी समीकरणों का गुणा-भाग कर रही है। दोनों ही पार्टियों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय है, इसलिए वे ऐसे नाम चुनना चाहती हैं जिन पर कोई विवाद न हो और जो सदन में छत्तीसगढ़ की आवाज को मजबूती से उठा सकें। अब देखना यह है कि आज शाम तक किसके नाम की लॉटरी खुलती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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