
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शादी-ब्याह और अन्य उत्सवों के सीजन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शहर में देर रात तक बजने वाले तेज आवाज के डीजे और धुमाल से आम जनता को होने वाली परेशानियों को देखते हुए रायपुर पुलिस ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब रात 10 बजे के बाद डीजे या किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संचालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक: नियमों की दी गई जानकारी
नियमों को धरातल पर उतारने के लिए पुलिस प्रशासन ने शहर के प्रमुख डीजे, धुमाल और बैंड संचालकों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की। एडिशनल डीसीपी तार्केश्वर पटेल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संचालकों को ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग से संबंधित वैधानिक नियमों और न्यायालय के आदेशों के बारे में विस्तार से बताया गया। पुलिस ने साफ तौर पर कहा कि उत्सवों की खुशी में दूसरों की शांति भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
समय सीमा और आवाज की तीव्रता पर कड़े निर्देश
बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना सभी संचालकों के लिए अनिवार्य होगा:
- समय का बंधन: रात 10:00 बजे के बाद किसी भी स्थिति में डीजे या धुमाल नहीं बजाया जाएगा।
- साउंड वॉल्यूम पर नियंत्रण: कार्यक्रम के दौरान साउंड की आवाज को उसकी कुल क्षमता के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रखा जा सकेगा।
- आम जनता का ख्याल: आवाज कम रखने का उद्देश्य बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और छात्रों को होने वाली असुविधा को कम करना है।
संचालकों को अंतिम चेतावनी और सख्त कार्रवाई का प्रावधान
पुलिस अधिकारियों ने संचालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि नियमों की अनदेखी करने पर केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि सामग्री की जब्ती और लाइसेंस निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। एडिशनल डीसीपी ने संचालकों से अपील की है कि वे स्वयं नियमों का पालन करें और आयोजकों को भी इसके लिए जागरूक करें। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले संचालकों को काली सूची (Blacklist) में डाल दिया जाएगा।
प्रशासन और जनता के बीच सहयोग की अपील
रायपुर पुलिस ने शहर के नागरिकों और कार्यक्रम आयोजकों से भी प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। पुलिस का मानना है कि केवल सख्त नियमों से शोर पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता, इसके लिए सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है। बैठक में मौजूद कई संचालकों ने भी नियमों के पालन का आश्वासन दिया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों के पास शोर करने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
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