
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की एक नन्ही वैज्ञानिक ने अपनी सूझबूझ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। गंगरेल डूबान क्षेत्र के ग्राम तिरी की रहने वाली 14 वर्षीय नंदनी सोनवानी ने कचरा समझे जाने वाले ‘भुट्टे के छिलकों’ से शानदार दोना तैयार किया है। नंदनी के इस नवाचार (Innovation) का चयन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय इंस्पायर अवार्ड के लिए हुआ है। अब यह ग्रामीण प्रतिभा जून के महीने में जापान में आयोजित ‘सकुरा साइंस प्रोग्राम’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही है।
शादी के घर से मिला आइडिया: प्लास्टिक को मात देने की ठानी
नंदनी ने बताया कि इस मॉडल को बनाने की प्रेरणा उन्हें एक शादी समारोह के दौरान मिली। वहां उन्होंने देखा कि लोग प्लास्टिक और डिस्पोजेबल दोने का इस्तेमाल कर उन्हें यहां-वहां फेंक रहे थे, जो पर्यावरण के लिए घातक हैं। पहले उन्होंने पत्तों से दोना बनाने की कोशिश की, लेकिन वह उतने मजबूत नहीं थे। अचानक उनकी नजर भुट्टे के छिलकों पर पड़ी। उन्होंने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में इन छिलकों को प्रोसेस किया और दोना बनाने वाली मशीन की मदद से एक मजबूत और पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल दोना तैयार कर लिया।
ब्लॉक से जापान तक का सफर: हर स्तर पर मिली सराहना
नंदनी का यह सफर आसान नहीं था। साल 2022-23 में तैयार किए गए इस मॉडल को सबसे पहले ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया गया। वहां से चयन होने के बाद यह जिला, फिर राज्य और अंत में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। राज्योत्सव के दौरान भी इस मॉडल की काफी तारीफ हुई थी। अब यह नवाचार सात समंदर पार जापान के सकुरा प्रोग्राम में प्रदर्शित होगा। नंदनी 28 जून को धमतरी से रवाना होंगी और 4 जुलाई को अपनी यात्रा पूरी कर वापस लौटेंगी।
छत्तीसगढ़ के 4 होनहारों में शामिल नंदनी
इंस्पायर अवार्ड योजना के तहत देशभर से कुल 113 बच्चों का चयन हुआ है, जिन्हें दो अलग-अलग बैच में जापान भेजा जाएगा। पहले बैच में जाने वाले 56 बच्चों में धमतरी की नंदनी भी शामिल हैं। खास बात यह है कि पूरे छत्तीसगढ़ से केवल 4 बच्चों का चयन इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए हुआ है, जिनमें इफरा बानो, लक्ष्मण सिंह और सैयद कासिफ अली के साथ नंदनी का नाम दर्ज है। ये सभी बच्चे दिल्ली से रवाना होकर जापान पहुंचेंगे।
शिक्षक का मार्गदर्शन और विभाग का सहयोग
नंदनी ने यह उपलब्धि अपने शिक्षक कैलाश नारायण बजरंग के कुशल मार्गदर्शन में हासिल की है। जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल और कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने छात्रा की इस सफलता पर खुशी जाहिर की है। जिला नोडल अधिकारी देवेश सूर्यवंशी और जिला प्रभारी अनिल कुमार साहू ने बताया कि नंदनी जब माध्यमिक शाला तिरी में थी, तब उसने यह मॉडल बनाया था। वर्तमान में वह शासकीय हाईस्कूल अकलाडोंगरी की छात्रा है। शासन से निर्देश मिलते ही अब उसके पासपोर्ट की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
कचरे से कंचन बनाने का संदेश
नंदनी का यह प्रोजेक्ट न केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है। कृषि अवशेषों, जिन्हें अक्सर किसान जला देते हैं या फेंक देते हैं, उनसे उपयोगी वस्तुएं बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जा सकती है। भुट्टे के छिलके से बना यह दोना पूरी तरह प्राकृतिक है और मिट्टी में मिलने पर खाद का काम करता है। जापान में इस मॉडल के जरिए नंदनी दुनिया को सस्टेनेबल लिविंग (Sustainable Living) का भारतीय तरीका सिखाएंगी।
धमतरी में जश्न का माहौल
बिटिया के जापान जाने की खबर लगते ही गांव तिरी और अकलाडोंगरी में जश्न का माहौल है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी एक दिन विदेश जाकर अपनी प्रतिभा दिखाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नंदनी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। इस सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और लगन हो, तो गांव की सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी वैश्विक पटल पर अपनी जगह बना सकते हैं।
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