
जगदलपुर में लंबे समय की खामोशी के बाद माओवादी संगठन का एक नया चेहरा सामने आया है। माड़ डिवीजन कमेटी की सचिव रणीता ने एक प्रेस नोट जारी कर सुरक्षा महकमे में हलचल तेज कर दी है। इस पत्र में रणीता ने खुद को ‘जेनजी नक्सली’ बताया है और स्पष्ट किया है कि संगठन हथियार डालने के मूड में नहीं है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि उनकी लड़ाई थमेगी नहीं बल्कि आने वाले समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसक गतिविधियों को और तेज किया जाएगा।
खत्म मानी जा रही कमेटी में नई जान फूंकने की कोशिश
सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए यह खबर चौंकाने वाली है क्योंकि कुछ समय पहले बड़े नक्सली नेता रूपेश के आत्मसमर्पण के बाद माना जा रहा था कि माड़ डिवीजन लगभग बिखर चुका है। रणीता के इस नए दावे ने उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है जिनमें संगठन के कमजोर होने की बात कही जा रही थी। अब पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी इस पत्र के पीछे छिपे नेटवर्क और इसकी असलियत का पता लगाने में जुट गए हैं। जांच इस बात पर टिकी है कि क्या वाकई संगठन के भीतर कोई नई पीढ़ी कमान संभाल रही है।
अलर्ट मोड पर सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग
इस प्रेस नोट के सार्वजनिक होने के बाद पूरे बस्तर संभाग में जवानों को अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस अधिकारी अब इस पत्र की लिखावट और जारी करने के तरीके का विश्लेषण कर रहे हैं। अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि क्या यह नक्सलियों की कोई नई चाल है ताकि सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाया जा सके। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में तैनात कैंपों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखें क्योंकि रणीता के तेवर काफी आक्रामक नजर आ रहे हैं।
31 मार्च की डेडलाइन और सरकार की रणनीति
नक्सलियों का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की तारीख तय कर रखी है। इस लक्ष्य को पूरा होने में अब महज 15 दिन का वक्त बचा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने बस्तर दौरे पर साफ कहा था कि सुरक्षा बलों के निरंतर प्रहार से नक्सली अब बैकफुट पर आ चुके हैं। सरकार का मानना है कि उनकी घेराबंदी अब अंतिम दौर में पहुंच गई है और जल्द ही इसके परिणाम सामने आएंगे।
गृह मंत्री के दावे और धरातल की असल चुनौती
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी हाल ही में कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने का काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का पूरा जोर अब उन इलाकों तक पहुंचने पर है जिन्हें नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था। हालांकि रणीता के इस ताजा ऐलान ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा बलों के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। अब देखना होगा कि 31 मार्च की समय सीमा तक सरकार इस नई चुनौती से कैसे निपटती है।



