
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का आगाज भारी अव्यवस्थाओं के बीच हुआ। मंगलवार को जब छात्र गणित का पहला पर्चा देने परीक्षा हॉल पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए। प्रश्न-पत्र में न केवल पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल पूछे गए थे, बल्कि उत्तर लिखने के लिए जगह भी इतनी कम थी कि बच्चों को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ा। शिक्षा विभाग की इस लचर तैयारी ने एक बार फिर बोर्ड परीक्षा के दावों की पोल खोल दी है।
9 नंबर के सवाल आउट ऑफ सिलेबस: छात्रों में छाई निराशा
परीक्षा देकर बाहर निकले छात्र-छात्राओं के चेहरों पर मायूसी साफ देखी जा सकती थी। विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रश्न-पत्र में लगभग तीन सवाल ऐसे थे, जो उनके पाठ्यक्रम (सिलेबस) का हिस्सा ही नहीं थे। इन सवालों का कुल भार 9 अंक था। छात्रों ने बताया कि काफी समय बर्बाद करने के बाद भी उन्हें सवाल समझ नहीं आए, क्योंकि उन्होंने साल भर इनकी तैयारी ही नहीं की थी। इस बड़ी चूक ने मेधावी छात्रों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।
रफ कार्य के लिए जगह नदारद: शिक्षकों को बांटने पड़े अलग से पन्ने
गणित जैसे विषय में रफ कार्य (Rough Work) सबसे अनिवार्य हिस्सा होता है, लेकिन विभाग ने प्रश्न-पत्र सह उत्तर पुस्तिका में इसके लिए कोई जगह ही नहीं छोड़ी थी। हद तो तब हो गई जब लंबे सवालों के जवाब लिखने के लिए दी गई जगह भी कम पड़ गई। ऐन वक्त पर मची इस अफरा-तफरी को देखते हुए पर्यवेक्षकों ने आनन-फानन में बच्चों को रफ कार्य के लिए अलग से सफेद कागज बांटे। इस अव्यवस्था के कारण बच्चों का कीमती समय बर्बाद हुआ और उनका ध्यान भी भटका।
प्रश्न-पत्र की गुणवत्ता पर उठे सवाल: न निर्देश, न हस्ताक्षर की जगह
विशेषज्ञों और शिक्षकों ने इस साल के प्रश्न-पत्र की तुलना पिछले साल के पर्चे से करते हुए इसे बेहद घटिया बताया है। कागज की क्वालिटी इतनी खराब थी कि उस पर पेन चलाना मुश्किल हो रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रश्न-पत्र के पहले पन्ने पर न तो परीक्षार्थियों के लिए कोई निर्देश (Instructions) लिखे थे और न ही पर्यवेक्षक (Invigilator) के हस्ताक्षर के लिए कोई कॉलम बनाया गया था। यह साफ तौर पर प्रश्न-पत्र तैयार करने वाली टीम की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
“पैसे बचाने के चक्कर में बच्चों का भविष्य दांव पर”
छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ ने इस पूरे मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रांताध्यक्ष संजय तिवारी ने रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संघ का आरोप है कि कार्यालय ने कुछ पैसे बचाने के चक्कर में न तो रफ कार्य के लिए अलग से कागज प्रिंट कराए और न ही उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त जगह दी। इस कंजूसी का खामियाजा अब नन्हे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जो परीक्षा हॉल में परेशान होते रहे।
बोनस अंकों की मांग: विवादित सवालों पर मचा बवाल
शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि प्रश्न क्रमांक 1.14, प्रश्न 3 और प्रश्न 20 पूरी तरह से आउट ऑफ सिलेबस थे। चूंकि ये सवाल कुल 9 अंकों के हैं, इसलिए संघ ने मांग की है कि मूल्यांकन के समय सभी प्रभावित छात्रों को ‘बोनस अंक’ दिए जाएं। अभिभावकों का कहना है कि अगर विभाग सिलेबस के अनुसार पेपर तैयार नहीं कर सकता, तो बोर्ड परीक्षा कराने का क्या औचित्य है? इस मुद्दे पर अब शिक्षा विभाग के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
सिस्टम की लापरवाही और छात्रों का मानसिक दबाव
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बोर्ड स्तर की परीक्षाओं के आयोजन में जमीनी स्तर पर कितनी कमियां हैं। 20 सवालों के लिए 80 नंबर निर्धारित थे, लेकिन विभाग की गलतियों ने परीक्षा की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। फिलहाल, छात्र और परिजन इस बात को लेकर चिंतित हैं कि गणित के इस बिगड़े हुए पेपर का असर उनके फाइनल रिजल्ट पर कैसा पड़ेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस चूक की जिम्मेदारी किस पर तय करता है।



