
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज सेना और पुलिस के जांबाज जवानों के सम्मान और सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो ने वीरता पदक (गैलेंट्री अवॉर्ड) पाने वाले जवानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाए। इस संवेदनशील विषय पर चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्वीकार किया कि समय के साथ नियमों में बदलाव जरूरी है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जल्द ही वीर जवानों और उनके परिवारों के लिए एक बेहतर और सम्मानजनक नीति तैयार करेगी।
पूर्व सैनिक टोप्पो ने उठाए सवाल: पदकों के साथ क्या मिलता है सम्मान?
भारतीय सेना का हिस्सा रह चुके विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपनी ही सरकार से पूछा कि वीरता के लिए मिलने वाले अलग-अलग पदकों के आधार पर जवानों को राज्य में क्या विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने गैलेंट्री अवॉर्ड की श्रेणियों और उनसे जुड़े आर्थिक लाभों का पूरा ब्यौरा मांगा। टोप्पो ने तर्क दिया कि अपनी जान जोखिम में डालकर देश और प्रदेश की रक्षा करने वाले ये जवान हमारे असली हीरो हैं और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पदक मिलने के बाद उनका और उनके परिवार का जीवन गरिमापूर्ण बना रहे।
जमीन, शिक्षा और ब्याज में छूट: सुविधाओं के विस्तार की मांग
विधायक टोप्पो ने केवल नकद राशि तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने सुझाव दिया कि पदक विजेता जवानों को कृषि या आवास के लिए जमीन देने का प्रावधान होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने वीर जवानों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज (लोन) की ब्याज दरों में विशेष रियायत देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इन सामाजिक सुरक्षा उपायों से न केवल वर्तमान जवानों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि युवा भी सेना और पुलिस में जाने के लिए प्रेरित होंगे।
विजय शर्मा का जवाब: केंद्र और राज्य मिलकर देते हैं सम्मान राशि
सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले वीरता पदकों के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय अपनी ओर से सम्मान राशि तय करता है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ सरकार भी राज्य के वीर सपूतों को एकमुश्त राशि प्रदान करती है। हालांकि मासिक आर्थिक मदद की जिम्मेदारी उस विभाग की होती है जहां जवान कार्यरत है। गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कुछ सुविधाएं लागू हैं लेकिन उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने की गुंजाइश हमेशा रहती है।
एक पूर्व सैनिक के अनुभव से बनेगी नई नीति
चर्चा के दौरान एक खास पल तब आया जब डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने रामकुमार टोप्पो के सैनिक बैकग्राउंड की तारीफ की। उन्होंने कहा कि टोप्पो खुद सेना में रहकर देश की सेवा कर चुके हैं इसलिए उन्हें इन बारीकियों और जवानों की जरूरतों की गहरी समझ है। गृहमंत्री ने सदन में ही घोषणा की कि वे व्यक्तिगत रूप से रामकुमार टोप्पो के साथ बैठकर इस विषय पर चर्चा करेंगे। उनके सुझावों के आधार पर वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं के लिए नए और बेहतर प्रावधान तैयार किए जाएंगे जिससे उनके परिवारों को असली सुरक्षा मिल सके।
जवानों के सम्मान में सरकार का बड़ा वादा
विधानसभा की इस चर्चा ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ सरकार अब वीरता पुरस्कारों को लेकर अपनी नीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद केवल आर्थिक मदद देना नहीं बल्कि समाज में इन वीरों की प्रतिष्ठा को और ऊंचा उठाना है। आने वाले दिनों में गृह विभाग पदक विजेताओं के लिए नई कल्याणकारी योजनाओं का खाका पेश कर सकता है। सदन के इस फैसले से प्रदेश के हजारों पुलिसकर्मियों और सेना में कार्यरत छत्तीसगढ़ के जवानों में खुशी की लहर है।



