ससुराल की आर्थिक स्थिति सुधारने किया अफीम की खेती: झारखंड से रायगढ़ आकर मार्शल संगा उगा रहा था अफीम

रायगढ़ जिले में अफीम की अवैध खेती के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। झारखंड का रहने वाला मार्शल संगा, जो पिछले सात सालों से छत्तीसगढ़ में रह रहा था, अपने ससुराल की माली हालत सुधारने के चक्कर में सलाखों के पीछे पहुंच गया है। पुलिस ने उसके पास से करीब 2 करोड़ 5 लाख रुपये मूल्य की अफीम जब्त की है। जांच में पता चला है कि मार्शल ने बेहद शातिराना तरीके से दुर्गम इलाके को अपनी खेती के लिए चुना था ताकि किसी को कानों-कान खबर न हो।

घर जमाई बनते ही बदला इरादा: मजदूरी छोड़ बना ‘ड्रग्स का सौदागर’

मार्शल संगा मूल रूप से झारखंड का निवासी है, लेकिन शादी के बाद वह रायगढ़ में अपने ससुराल में ही बस गया। शुरुआत में वह ठेकेदारी के काम में मजदूरी करता था और काम के सिलसिले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल आता-जाता रहता था। ससुराल की आर्थिक तंगी देख उसने कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का शॉर्टकट खोजा। उसने सोचा कि अगर वह अपने ससुराल में ही रहकर अफीम उगाएगा, तो न केवल परिवार की गरीबी दूर होगी, बल्कि उसे काम के लिए बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा।

झारखंड से बुलाए एक्सपर्ट भाई: पुश्तैनी जमीन पर शुरू किया काला कारोबार

अफीम की खेती की बारीकियां सीखने के लिए मार्शल ने झारखंड से अपने चचेरे भाइयों को रायगढ़ बुलाया। उसके भाइयों को इस खेती का पुराना अनुभव था। भाइयों और झारखंड के ही कुछ अनुभवी मजदूरों की मदद से उसने खेती की पूरी योजना तैयार की। उसने ससुर की उस पुश्तैनी जमीन का चुनाव किया जहां आम लोगों का आना-जाना लगभग नामुमकिन था, ताकि यह गैर-कानूनी काम पूरी तरह गुप्त रहे।

तरबूज की आड़ में अफीम का खेल: केलो परियोजना की जमीन का इस्तेमाल

मार्शल ने बहुत चालाकी से ऐसी जमीन चुनी जिसका मुआवजा सरकार पहले ही दे चुकी थी। केलो नदी के कछार पर स्थित इस जमीन पर केलो परियोजना के कारण अब खेती नहीं होती थी और वह वीरान पड़ी थी। लोगों को गुमराह करने और पुलिस की नजरों से बचने के लिए मार्शल ने खेत के ऊपरी हिस्से में तरबूज की फसल लगा दी थी, जबकि उसके बीच में एक एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती लहलहा रही थी।

शक से बचने का पैंतरा: कोलकाता जाकर करने लगा मजदूरी

मार्शल खुद को बेगुनाह दिखाने के लिए लगातार पैंतरे बदलता रहा। फसल लगाने के बाद वह कुछ समय के लिए कोलकाता चला गया ताकि गांव वालों को लगे कि वह अभी भी मजदूरी ही कर रहा है। वह हाल ही में रायगढ़ वापस लौटा था ताकि फसल की कटाई और अफीम निकालने की प्रक्रिया को अंजाम दे सके। उसे लगा था कि मजदूरी का चोगा ओढ़कर वह कानून की नजरों से बच जाएगा, लेकिन उसकी यह चाल नाकाम रही।

खबरों से बढ़ी बेचैनी: आनन-फानन में फसल काटने की कोशिश

पिछले कुछ दिनों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस द्वारा अफीम पकड़े जाने की खबरों ने मार्शल को डरा दिया था। पकड़े जाने के डर से उसने समय से पहले ही अफीम निकालने का काम शुरू कर दिया। वह जल्द से जल्द माल समेटकर ठिकाने लगाना चाहता था, लेकिन तभी पुलिस की टीम ने रेड मार दी और मार्शल रंगे हाथों पकड़ा गया। उसकी हड़बड़ाहट ही उसके पकड़े जाने की सबसे बड़ी वजह बनी।

पुराने स्टॉक की आशंका: क्या पिछले साल भी हुई थी खेती?

पुलिस को मार्शल के ससुराल से करीब 3 किलो तैयार अफीम बरामद हुई है। जांच अधिकारियों को संदेह है कि यह पिछले साल का बचा हुआ स्टॉक हो सकता है। आमतौर पर अफीम की खेती नवंबर में शुरू होती है और मार्च में उससे ‘दूध’ (अफीम का अर्क) निकालने का काम होता है। ससुर के घर से भारी मात्रा में तैयार अफीम मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि मार्शल काफी समय से इस काले कारोबार में लिप्त था।

पुलिस की बड़ी सफलता: नशे के सौदागरों को सख्त चेतावनी

रायगढ़ पुलिस ने मार्शल की गिरफ्तारी को एक बड़ी कामयाबी माना है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सक्रिय अन्य नशा तस्करों में हड़कंप मच गया है। पुलिस अब उन चचेरे भाइयों और झारखंड के मजदूरों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस पूरी साजिश में मार्शल का साथ दिया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में होने वाली ऐसी संदिग्ध गतिविधियों पर अब ड्रोन और इंटेलिजेंस के जरिए पैनी नजर रखी जाएगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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