
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के लिए 22 मार्च का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। गंगरेल बांध की विशाल जलधारा पर पहली बार ‘गंगरेल नौकायान उत्सव’ का आयोजन किया गया, जिसने शहर को एक नई पहचान दी है। महानदी रिवर बोट चैंपियनशिप के नाम से हुए इस आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों को रोमांचित किया, बल्कि पर्यटन के नक्शे पर धमतरी का नाम मजबूती से उभारा है। मचान हाट से लेकर ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स प्वाइंट तक करीब 1000 मीटर के दायरे में हुई इस रेस में हवा से बातें करती नावों और चप्पू की रफ्तार ने दर्शकों की सांसें थाम दीं।
लहरों पर रफ्तार का मुकाबला: 52 टीमों ने झोंकी अपनी पूरी ताकत
इस ऐतिहासिक चैंपियनशिप में केवल धमतरी ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिले कांकेर और बालोद की टीमों ने भी हिस्सा लिया। कुल 52 टीमों ने इस प्रतियोगिता में अपनी दावेदारी पेश की, जिससे यह आयोजन एक बड़े खेल महाकुंभ में तब्दील हो गया। विधायक ओमकार साहू और कलेक्टर अविनाश मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दिखाकर रेस की शुरुआत की। जैसे ही विसिल बजी, शांत दिखने वाला गंगरेल बांध तालियों की गड़गड़ाहट और चप्पू की आवाज से गूंज उठा।

महिला शक्ति का दिखा दम: पारंपरिक नावों के साथ मैदान में उतरीं बेटियां
इस आयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब सामने आई जब ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अपनी पारंपरिक लकड़ी की नाव लेकर लहरों से टकराने उतरीं। ग्राम तिर्रा की चयन बाई, सुमन और दिनेश्वरी ने साबित कर दिया कि वे किसी भी चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। बिना किसी आधुनिक मशीनरी के, केवल अपने साहस और संतुलन के दम पर उन्होंने 1000 मीटर की दूरी तय की। उनके इस जज्बे ने महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिख दी है।

विजेताओं पर हुई धनवर्षा: 1 लाख रुपये का मिला पहला इनाम
प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होते ही खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कड़ी टक्कर के बाद बोट क्रमांक 04 के रोमार निषाद और जीतू निषाद ने पहला स्थान प्राप्त कर एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार जीता। वहीं, कोलियारी के सत्वंत और मिथलेश मंडावी को 50,000 रुपये का दूसरा इनाम मिला। तिर्रा गांव के कोमल निषाद और महेश्वर की जोड़ी 25,000 रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रही। सभी विजेताओं को मुख्य अतिथियों ने ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया।
वेशभूषा और सजावट ने जीता दिल: रंग-बिरंगी नावों का दिखा जलवा
सिर्फ रफ्तार ही नहीं, बल्कि कलात्मकता का भी इस उत्सव में विशेष ध्यान रखा गया था। नावों की सजावट और नाविकों की पारंपरिक वेशभूषा के लिए अलग से पुरस्कार दिए गए। तिर्रा की पवनबाई और देवनबती निषाद को उनकी अनूठी वेशभूषा के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, रामनारायण और रिशीराम ने अपनी नाव को इतनी खूबसूरती से सजाया था कि उन्हें ‘बेस्ट डेकोरेशन’ का 11,000 रुपये का विशेष पुरस्कार मिला। प्रशासन ने महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से सांत्वना पुरस्कार भी बांटे।

पर्यावरण का संदेश: पौधरोपण के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
प्रशासन ने इस बड़े आयोजन के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी नहीं भुला। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों ने बांध के किनारे पौधरोपण किया। यह संदेश दिया गया कि विकास और पर्यटन तभी सार्थक है जब हम अपनी प्रकृति की रक्षा करें। गंगरेल क्षेत्र की हरियाली को बचाए रखने का संकल्प लेते हुए इस उत्सव को ‘इको-फ्रेंडली’ बनाने की कोशिश की गई।
मछुआरा समाज का सम्मान: बांटे गए आइस बॉक्स और जरूरी उपकरण
इस आयोजन का एक मुख्य उद्देश्य स्थानीय मछुआरा समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना भी था। कार्यक्रम के दौरान मत्स्य विभाग ने 8 विभिन्न मछुआ समितियों को आइस बॉक्स वितरित किए। इससे मछुआरों को अपनी मछलियां सुरक्षित रखने और उन्हें बाजार तक सही स्थिति में पहुंचाने में मदद मिलेगी। यह कदम स्थानीय रोजगार और मत्स्य पालन व्यवसाय को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
सुरक्षा की नई पहल: ‘वॉटर एंबुलेंस’ का हुआ शुभारंभ
गंगरेल बांध जैसे बड़े जल क्षेत्र में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने ‘वॉटर एंबुलेंस’ की शुरुआत की है। यह एंबुलेंस आधुनिक उपकरणों से लैस है और किसी भी हादसे के दौरान तत्काल प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने में सक्षम है। सैलानियों और स्थानीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सुविधा गंगरेल के पर्यटन को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगी।
पर्यटन का नया हब: एडवेंचर स्पोर्ट्स की दिशा में बड़ा कदम
कलेक्टर अविनाश मिश्रा के अनुसार, गंगरेल नौकायान उत्सव महज एक खेल नहीं, बल्कि धमतरी को एडवेंचर टूरिज्म का केंद्र बनाने की एक शुरुआत है। यहां की भौगोलिक स्थिति बोटिंग, कयाकिंग और अन्य जल क्रीड़ाओं के लिए बेहद अनुकूल है। आने वाले समय में यहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और बाहरी राज्यों के पर्यटक भी धमतरी की ओर आकर्षित होंगे।
धमतरी की नई पहचान: खेल और संस्कृति का अनोखा संगम
महानदी रिवर बोट चैंपियनशिप ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं को अगर सही मंच मिले, तो वे कमाल कर सकते हैं। यह आयोजन धमतरी की संस्कृति और महानदी के प्रति लोगों के जुड़ाव का प्रतीक बन गया है। अब हर साल 22 मार्च को इस उत्सव के भव्य आयोजन की तैयारी की जा रही है, ताकि गंगरेल की लहरों पर यह रोमांच हमेशा बना रहे।



