
धमतरी के जिला कलेक्टर अबिनाश मिश्रा शनिवार को एक अलग ही अंदाज में नजर आए। डूबान प्रभावित ग्राम उरपुटी के दौरे पर निकले कलेक्टर अचानक वहां के आंगनबाड़ी केंद्र पहुंच गए। प्रशासनिक तामझाम से दूर वे यहां बच्चों के बीच एक शिक्षक की भूमिका में दिखाई दिए। उन्होंने न केवल केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया बल्कि नन्हें-मुन्नों के साथ बैठकर उनसे बातचीत भी की। कलेक्टर को अपने बीच पाकर बच्चे भी उत्साहित दिखे और उन्होंने अपनी तोतली जुबान में छत्तीसगढ़ का राजगीत सुनाकर उनका स्वागत किया।
नन्हें बच्चों के बीच बने शिक्षक: कलेक्टर ने परखी बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा
आंगनबाड़ी केंद्र में प्रवेश करते ही कलेक्टर अबिनाश मिश्रा सीधे बच्चों की क्लास में जा पहुंचे। वहां उन्होंने खेल-खेल में बच्चों की समझ और शिक्षा के स्तर को परखा। उन्होंने बच्चों से बड़े ही प्यार से उनके पसंदीदा फलों, रंगों और जानवरों के नाम पूछे। बच्चों ने भी बिना डरे और पूरे आत्मविश्वास के साथ एक-एक कर कलेक्टर के सवालों के जवाब दिए। बच्चों की इस हाजिरजवाबी और सीखने की ललक देख कलेक्टर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की।

व्यवस्थाओं का कड़ा इम्तिहान: नाश्ता, पोषण आहार और सफाई की हुई समीक्षा
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केवल बच्चों से बात ही नहीं की बल्कि केंद्र की बुनियादी सुविधाओं की भी बारीकी से जांच की। उन्होंने बच्चों को दिए जाने वाले सुबह के नाश्ते और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता देखी। इसके साथ ही केंद्र में बच्चों की उपस्थिति के रजिस्टर और अन्य सरकारी दस्तावेजों के रख-रखाव की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र में साफ-सफाई और बच्चों के बैठने की व्यवस्था को संतोषजनक पाया और निर्देश दिए कि भविष्य में भी इसी तरह का मानक स्तर बनाए रखा जाए।
कुपोषण के खिलाफ जंग: बच्चों के स्वास्थ्य और वजन रिकॉर्ड की जांच
धमतरी कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों के स्वास्थ्य कार्ड और उनके नियमित वजन मापन की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कुपोषण मुक्त अभियान को पूरी गंभीरता के साथ चलाया जाए। कलेक्टर ने कहा कि डूबान क्षेत्र होने की वजह से यहां स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर खास नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने प्रत्येक बच्चे के पोषण स्तर की सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा ताकि कोई भी बच्चा कुपोषण के दायरे में न रहे और सभी का शारीरिक विकास सही ढंग से हो सके।
गर्मी से बचाव की तैयारी: बच्चों को दिए खिलौने और सिखाई स्वच्छता की आदत
बढ़ते तापमान और लू के खतरे को देखते हुए कलेक्टर ने केंद्र में ठंडे और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों को व्यक्तिगत पानी की बोतल साथ रखने के लिए प्रेरित करने को कहा। इसके अलावा उन्होंने बच्चों को अपने हाथ साफ रखने और स्वच्छता की आदतें विकसित करने की सीख दी। निरीक्षण के अंत में कलेक्टर ने बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए उन्हें खिलौने और मिठाइयां बांटीं, जिससे केंद्र का माहौल काफी खुशनुमा हो गया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाई: दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर सेवा पर मिली शाबाशी
कलेक्टर ने उरपुटी जैसे दूरस्थ और डूबान प्रभावित क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा दी जा रही सेवाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और पोषण उपलब्ध कराना एक सराहनीय कार्य है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र ही वह जगह है जहां से एक सशक्त पीढ़ी की नींव रखी जाती है। प्रशासन की ओर से केंद्र को हर संभव मदद और संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।
भविष्य की तैयारी: शिक्षित और सशक्त पीढ़ी तैयार करने पर दिया जोर
इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की जमीनी हकीकत जानना था। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल भोजन वितरण केंद्र न माना जाए बल्कि इन्हें बच्चों के सर्वांगीण विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य की नींव मजबूत होगी तभी भविष्य के लिए एक स्वस्थ और शिक्षित समाज तैयार हो पाएगा। इस दौरे ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को और मजबूत करने का काम किया है।



