Aadhar-Based Attendance: सरकारी दफ्तरों में आधार आधारित हाजिरी अनिवार्य, लेटलतीफ कर्मचारियों पर कलेक्टर ने कसा शिकंजा

Aadhar-Based Attendance: आधार आधारित हाजिरी प्रणाली को अब सरगुजा जिले के सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य सरकारी कामकाज में तेजी लाना और दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति को पारदर्शी बनाना है। कलेक्टर खुद इस पूरी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय पर अपने डेस्क पर मौजूद रहे। इस नई व्यवस्था के आने से अब कागजी हाजिरी का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

12 हजार कर्मचारियों पर सीधी नजर

Biometric Attendance: जिले के लगभग 60 अलग-अलग विभागों में कार्यरत 12 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी अब इस डिजिटल दायरे में आ चुके हैं। लॉग-इन आईडी के माध्यम से ई-अटेंडेंस ली जा रही है जिसे सीधे आधार कार्ड से जोड़ा गया है। कलेक्ट्रेट और राजस्व विभाग जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाजिरी ऑनलाइन दर्ज होने के कारण अब डेटा में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो गई है और वरिष्ठ अधिकारी एक क्लिक पर किसी भी विभाग की स्थिति देख सकते हैं।

देरी से आने पर कटेगा वेतन

Surguja News: प्रशासन ने समय के पाबंद न होने वाले कर्मचारियों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। यदि कोई कर्मचारी ऑफिस आने में देरी करता है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित विभागाध्यक्ष की होगी और उन्हें इसका जवाब देना होगा। कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि बार-बार लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के वेतन पर भी इसका असर पड़ सकता है। अनुशासन बनाए रखने के लिए अनुपस्थिति या देरी को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी भी कर ली गई है।

एनआईसी ने चरणबद्ध तरीके से लागू किया सिस्टम

एनआईसी के अधिकारियों ने बताया कि इस आधुनिक हाजिरी प्रणाली की शुरुआत सितंबर 2025 में की गई थी। शुरुआती चरण में करीब 5 हजार कर्मचारियों को इससे जोड़ा गया था ताकि तकनीकी बारीकियों को समझा जा सके। सफल ट्रायल के बाद जनवरी 2026 से शासन के निर्देशों का पालन करते हुए इसे जिले के सभी विभागों में पूरी तरह प्रभावी कर दिया गया है। अब जिला स्तर पर एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार है जो रियल-टाइम अटेंडेंस रिपोर्ट देता है।

शिक्षा विभाग के लिए अलग मोबाइल ऐप

भले ही अधिकांश विभागों को आधार आधारित सिस्टम से जोड़ दिया गया है, लेकिन शिक्षा विभाग के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके पीछे का कारण स्कूलों की भौगोलिक स्थिति और शिक्षकों की फील्ड ड्यूटी को बताया जा रहा है। हालांकि, वहां भी डिजिटल माध्यम से ही हाजिरी ली जा रही है ताकि जिले की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था में भी सुधार लाया जा सके।

कलेक्टर की समीक्षा बैठक में होगा फैसला

कलेक्टर अजीत वसंत ने सभी विभागीय प्रमुखों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे ई-अटेंडेंस नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी साफ किया है कि अगली समय-सीमा (TL) की बैठक में वह खुद विभागवार हाजिरी की समीक्षा करेंगे। जो विभाग इसमें लापरवाही बरतेंगे या जिनके कर्मचारी सिस्टम का उपयोग नहीं कर रहे होंगे, उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। इस सख्ती का असर अब सरकारी दफ्तरों में सुबह के वक्त दिखने लगा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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