
Atmanand School Fees: आत्मानंद स्कूल को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश के प्रतिष्ठित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी और हिंदी माध्यम स्कूलों में अब तक मिलने वाली पूरी तरह मुफ्त शिक्षा की सुविधा समाप्त होने जा रही है। राज्य सरकार ने इन स्कूलों के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने के लिए छात्रों से मामूली शुल्क वसूलने का फैसला किया है। इस निर्णय का सीधा असर प्रदेश के उन हजारों परिवारों पर पड़ेगा जिनके बच्चे इन स्कूलों में उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
9वीं से 12वीं तक के छात्रों को देना होगा शुल्क
नए आदेश के मुताबिक फीस का यह प्रावधान केवल उच्च कक्षाओं के लिए लागू किया गया है। कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को अब सालाना करीब 1500 रुपये तक की फीस चुकानी होगी। इस राशि का वर्गीकरण भी स्पष्ट किया गया है जिसमें लगभग 450 रुपये स्कूल की ट्यूशन फीस के रूप में लिए जाएंगे। बाकी की बची हुई राशि शाला विकास समिति के मद में जमा की जाएगी ताकि स्थानीय स्तर पर स्कूल की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
751 स्कूलों तक पहुंचा आत्मानंद का नेटवर्क
साल 2020 में एक छोटे स्तर पर शुरू हुई स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना का विस्तार अब पूरे प्रदेश में हो चुका है। वर्तमान में राज्य के भीतर इन स्कूलों की कुल संख्या बढ़कर 751 हो गई है। हाल ही में रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने प्रदेशभर के प्राचार्यों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में स्कूलों की बढ़ती संख्या और उनके वित्तीय प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई और फीस वसूली की कार्ययोजना तैयार की गई।
बजट में बढ़ोतरी: अब मिलेगा 5 लाख का अनुदान
स्कूलों के बेहतर रखरखाव के लिए सरकार ने अनुदान राशि में भी बड़ा इजाफा किया है। पहले इन स्कूलों को मिलने वाले सालाना फंड को घटाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया था जिससे स्कूलों को सफाई, स्टेशनरी और बिजली जैसे मूलभूत खर्चों को निकालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। प्राचार्यों की फीडबैक रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा मंत्री ने इसे दोबारा बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति स्कूल करने का निर्देश दिया है ताकि संसाधनों की कोई कमी न रहे।
इंग्लिश स्पीकिंग डे और एआई आधारित पढ़ाई
सिर्फ फीस ही नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी नए निर्देश जारी हुए हैं। छात्रों की अंग्रेजी भाषा पर पकड़ मजबूत करने के लिए हर महीने एक दिन ‘इंग्लिश स्पीकिंग डे’ के रूप में मनाया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों में एआई (AI) आधारित शिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। स्मार्ट क्लासरूम और लाइब्रेरी के अधिकतम उपयोग की भी समीक्षा की गई है ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूलों के मुकाबले पिछड़ न जाएं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेगा विशेष मार्गदर्शन
स्वामी आत्मानंद स्कूलों को अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार की योजना है कि इन स्कूलों के छात्रों को इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नियमित तौर पर करियर गाइडेंस दिया जाए। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मेधावी छात्रों की पहचान कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें। साथ ही स्कूलों के अनुशासन को बनाए रखने के लिए मोबाइल के उपयोग पर भी कड़े नियंत्रण की बात कही गई है।
गुणवत्ता और भविष्य की चुनौतियां
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि आत्मानंद स्कूलों की सकारात्मक छवि को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। फीस वसूली का उद्देश्य छात्रों पर बोझ डालना नहीं बल्कि स्कूलों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि बोर्ड रिजल्ट और प्रवेश परीक्षाओं में छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकें। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से स्कूलों के वातावरण में सुधार होगा और छात्रों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शैक्षिक माहौल मिल सकेगा।



