Durg Cattle Accident: छत्तीसगढ़ में गौधाम योजना सिर्फ कागजों तक सीमित? दुर्ग में ट्रक ने 6 गायों को कुचला, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Durg News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक बार फिर मवेशियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। रविवार की रात उतई थाना क्षेत्र के आदर्श नगर बावापारा में एक अनियंत्रित ट्रक ने सड़क किनारे बैठी छह गायों को रौंद दिया। इस दर्दनाक हादसे में तीन गायों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तीन अन्य मवेशी गंभीर रूप से घायल हैं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मवेशियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। वारदात को अंजाम देने के बाद चालक ट्रक लेकर फरार हो गया, हालांकि बाद में पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

गौधाम योजना की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल

इस हादसे ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गौधाम योजना’ की सार्थकता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित आश्रय देना था, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। इसके बावजूद, दुर्ग की सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा कम नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौठानों और गौधामों में अव्यवस्था के कारण मवेशी सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं, जो उनके और वाहन चालकों, दोनों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

हादसे के बाद ग्रामीणों ने सड़क पर किया चक्काजाम

मवेशियों की मौत की खबर मिलते ही स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग को ब्लॉक कर चक्काजाम कर दिया। करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा और सड़क के दोनों ओर गाड़ियों का तांता लग गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस मार्ग पर मवेशी हादसों का शिकार हुए हैं। बार-बार चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने न तो मवेशियों को हटाने की जहमत उठाई और न ही भारी वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए कोई स्पीड ब्रेकर बनवाए।

प्रशासन और निगरानी तंत्र की बड़ी लापरवाही

सड़क पर बैठे मवेशियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग इस समय कटघरे में हैं। आखिर क्यों नगर निगम और स्थानीय निकाय इन मवेशियों को गौधाम तक पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं? रात के वक्त सड़कों पर निगरानी के लिए कोई टीम मौजूद नहीं रहती, जिसका फायदा उठाकर ट्रक चालक बेलगाम वाहन दौड़ाते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल आश्वासन देने के बजाय अब दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और मवेशियों को सड़कों से हटाने का ठोस प्लान बनाया जाए।

भारी वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा के अधूरे इंतजाम

बावापारा का यह मार्ग औद्योगिक गतिविधियों के कारण हमेशा व्यस्त रहता है। रात में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है, लेकिन पर्याप्त लाइटिंग और साइन बोर्ड की कमी के कारण सड़क पर बैठे मवेशी ड्राइवरों को दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों ने मांग की है कि रिहायशी इलाकों के बीच से गुजरने वाले इन भारी वाहनों के लिए समय सीमा तय की जाए और उन पर निगरानी रखने के लिए पुलिस पिकेट की व्यवस्था की जाए।

आश्वासन के भरोसे मवेशियों की जान पर बना खतरा

पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि, स्थानीय लोग अब इन खोखले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि हर हादसे के बाद जांच की बात कही जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति वैसी ही हो जाती है। यदि गौधाम योजना के तहत मवेशियों को सही जगह नहीं दी गई, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे होने से कोई नहीं रोक पाएगा।

स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना जरूरी

दुर्ग की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि मवेशियों की सुरक्षा के लिए केवल योजना बनाना काफी नहीं है, उसका सही क्रियान्वयन अनिवार्य है। प्रशासन को चाहिए कि वह आवारा मवेशियों के मालिकों पर जुर्माना लगाए और गौठानों में चारे-पानी की उचित व्यवस्था करे ताकि मवेशी बाहर न भटकें। इसके साथ ही सड़कों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे, ताकि बेगुनाह मवेशियों और आम नागरिकों की जान को जोखिम से बचाया जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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