Babu Khemani Online Betting Arrest: रायपुर में क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट के मास्टरमाइंड बाबू खेमानी मुंबई के होटल से गिरफ्तार, महादेव ऐप की तर्ज पर फैला रखा था सट्टे का जाल

Babu Khemani Arrest: छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी हासिल की है। क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट का मुख्य सरगना बाबू खेमानी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस की एक विशेष टीम ने मुंबई के एक आलीशान होटल में दबिश देकर बाबू खेमानी और उसके करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर फ्लाइट के जरिए रायपुर लाया गया है। इस कार्रवाई से सट्टा बाजार में हड़कंप मच गया है, हालांकि बाबू का भाई करण खेमानी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की आड़ में सट्टे का साम्राज्य

बाबू खेमानी रायपुर का ही रहने वाला है और खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पेश करता था। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उसकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है, जिसका इस्तेमाल वह सट्टे के प्रचार-प्रसार के लिए करता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, बाबू ने आईपीएल (IPL) मैचों के दौरान सट्टा खिलाने के लिए एक बेहद संगठित डिजिटल नेटवर्क तैयार किया था। वह अपनी चमक-धमक वाली लाइफस्टाइल दिखाकर युवाओं को कम समय में अमीर बनने का लालच देता और उन्हें दलदल में धकेलता था।

महादेव और अन्ना रेड्डी की तर्ज पर बनाई खुद की वेबसाइट

जांच में यह बात सामने आई है कि बाबू खेमानी ने महादेव बुक और अन्ना रेड्डी जैसे बड़े सट्टा सिंडिकेट से प्रेरणा लेकर खुद की वेबसाइट विकसित कर ली थी। वह ‘3 STUMPS’ नाम की वेबसाइट के जरिए करोड़ों का दांव लगवाता था। इस नेटवर्क को चलाने के लिए उसने कई तकनीकी जानकारों की मदद ली थी। सट्टे के इस कारोबार को प्रमोट करने के लिए वह अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों को भी मोटी रकम देता था ताकि वे अपने प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन बेटिंग का प्रचार कर सकें।

मुंबई और ओडिशा से जुड़े गिरोह के तार

इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने हाल ही में मुंबई और ओडिशा से करीब 20 सटोरियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में से एक हर्ष नागदेव ने बताया कि उसने ‘बजरंग ग्रुप’ नाम से एक ऐप बनाया था, जिसका रिमोट कंट्रोल मुंबई में बैठा बाबू खेमानी संभाल रहा था। इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस को सट्टे के उस बड़े नेटवर्क की कड़ियां मिलीं, जो छत्तीसगढ़ समेत देश के कई अन्य राज्यों में फैला हुआ था।

मोबाइल की दुकान से दुबई के कनेक्शन तक का सफर

बाबू और उसका भाई करण खेमानी पहले रायपुर के रविभवन इलाके में एक मामूली मोबाइल दुकान चलाते थे। लेकिन सट्टे के काले कारोबार में कदम रखने के बाद उनकी किस्मत रातों-रात बदल गई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों भाइयों का दुबई से भी गहरा कनेक्शन है और उनका अक्सर वहां आना-जाना लगा रहता था। सट्टे का धंधा चमकते ही उन्होंने मोबाइल दुकान बंद कर दी और पूरी तरह से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट के संचालन में जुट गए।

मैच के दौरान गोवा और पुणे में रहता था ठिकाना

गिरोह के काम करने का तरीका भी काफी शातिर था। आईपीएल सीजन या किसी भी बड़ी क्रिकेट सीरीज के दौरान बाबू और उसका भाई रायपुर में नहीं रुकते थे। वे पुणे, मुंबई या गोवा जैसे शहरों के बड़े होटलों में अपना बेस सेटअप करते थे और वहीं से पूरा पैनल ऑपरेट करते थे। मैच खत्म होने के बाद ही वे रायपुर लौटते थे। पुलिस ने सबसे पहले उनके कैशियर कमलेश देवांगन को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से मिली डायरी और मोबाइल डेटा ने मास्टरमाइंड तक पहुंचने का रास्ता साफ कर दिया।

गोवा में भी पकड़ा गया बड़ा पैनल, रायपुर से जुड़ा लिंक

मुंबई के साथ-साथ पुलिस ने गोवा में भी एक बड़े सट्टा पैनल का भंडाफोड़ किया है। गोवा से पकड़े गए आरोपियों से शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि वहां चल रहे नेटवर्क का तार भी सीधे तौर पर रायपुर के सटोरियों से जुड़ा है। पुलिस को संदेह है कि गोवा में पकड़े गए लोग भी बाबू खेमानी के लिए ही काम कर रहे थे। पुलिस अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर महादेव बुक की तरह एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा करने की तैयारी में है।

पुराने रिकॉर्ड और कई सरगनाओं की अब भी तलाश

बाबू खेमानी का अपराध की दुनिया से पुराना नाता है। करीब तीन साल पहले भी रायपुर पुलिस ने उस पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी, लेकिन तब वह मामूली जुर्माना भरकर छूट गया था। इस बार गंज थाने में दर्ज एफआईआर के बाद उस पर शिकंजा कस गया है। हालांकि, शहर के अलग-अलग इलाकों जैसे तेलीबांधा, शंकर नगर और तिल्दा-नेवरा के कई बड़े सटोरिए अब भी फरार हैं। पुलिस इन फरार आरोपियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

जांच जारी, आने वाले दिनों में होंगे कई बड़े खुलासे

बाबू खेमानी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच करा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस जांच से सट्टे के पैसे के लेन-देन, बेनामी संपत्तियों और इसमें शामिल कुछ रसूखदार सफेदपोशों के नाम भी सामने आ सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क में शामिल कई और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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