
Chhattisgarh VBJI Ramji Scheme Employment 125 Days: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए रोजगार के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी है। राज्य में 1 जुलाई से ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (वीबी जी राम जी) लागू होने जा रहा है. यह नई व्यवस्था पुरानी मनरेगा योजना का स्थान लेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को अधिक दिनों का काम और बेहतर आजीविका उपलब्ध कराना है. इस योजना को विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
मनरेगा का दौर खत्म, अब 125 दिन की गारंटी वाला नया कानून
केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, जिस दिन से वीबी जी राम जी अधिनियम प्रभावी होगा, उसी तारीख से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) समाप्त हो जाएगा. पुरानी व्यवस्था में जहां साल में 100 दिन के काम की गारंटी मिलती थी, वहीं अब ग्रामीणों को सालभर में कुल 125 दिनों का मजदूरी आधारित रोजगार मिल सकेगा. यह बदलाव उन परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा जो पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर हैं.
जॉब कार्ड को लेकर नहीं होगी परेशानी, जारी रहेंगे पुराने कार्ड
योजना के बदलाव को लेकर कई श्रमिकों के मन में कार्ड को लेकर संशय था, जिसे सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। जब तक नया ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं हो जाता, तब तक पुराने मनरेगा जॉब कार्ड पूरी तरह मान्य रहेंगे. जिन श्रमिकों के पास अब तक कार्ड नहीं है, वे अपनी ग्राम पंचायत में पंजीकरण के लिए आवेदन दे सकते हैं. सरकार ने यह भी साफ किया है कि केवल ई-केवाईसी लंबित होने की वजह से किसी भी जरूरतमंद को काम देने से मना नहीं किया जाएगा.
काम न मिलने पर घर बैठे मिलेगा बेरोजगारी भत्ता
इस अधिनियम में श्रमिकों के अधिकारों का विशेष ध्यान रखा गया है। अगर कोई श्रमिक काम की मांग करता है और प्रशासन उसे निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं करा पाता, तो वह श्रमिक ‘बेरोजगारी भत्ता’ पाने का हकदार होगा. मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक या डाकघर खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किया जाएगा. भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. यदि पैसे मिलने में देरी होती है, तो श्रमिकों को विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) भी दिया जाएगा.
क्या-क्या होंगे काम? बुनियादी ढांचे पर रहेगा जोर
इस योजना के तहत केवल गड्ढे खोदने जैसे पारंपरिक काम नहीं होंगे, बल्कि उत्पादक ग्रामीण संपत्तियों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा. इसमें मुख्य रूप से जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े निर्माण कार्य और खराब मौसम से बचाव संबंधी बुनियादी ढांचे तैयार किए जाएंगे. इससे न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि गांवों का कायाकल्प भी होगा और भविष्य के लिए टिकाऊ संपत्तियां तैयार होंगी.
बढ़ी हुई मजदूरी दरें और पंचायतों की बढ़ी जिम्मेदारी
नए कानून की धारा 10 के तहत श्रमिकों को बढ़ी हुई मजदूरी दरें देने का प्रावधान है. जब तक नई दरों की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक मनरेगा की वर्तमान दरें ही लागू रहेंगी. इस पूरी योजना के संचालन में ग्राम पंचायतों की भूमिका सबसे अहम होगी. परिवारों का रजिस्ट्रेशन करना, रोजगार के आवेदन लेना, काम का निष्पादन करना और रिकॉर्ड का रखरखाव करना ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी होगी.
ट्रांजिशन पीरियड में नहीं रुकेगा काम, जारी रहेंगे पुराने प्रोजेक्ट्स
मनरेगा से वीबी जी राम जी योजना में बदलाव के दौरान चल रहे कार्यों को रोका नहीं जाएगा. जो काम पहले से शुरू हो चुके हैं, वे नए अधिनियम के प्रावधानों के तहत जारी रह सकते हैं. यदि मौजूदा काम रोजगार की मांग पूरी करने के लिए कम पड़ते हैं, तो पंचायतों को नए अधिनियम की अनुसूची के हिसाब से नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने की पूरी छूट दी गई है. इस बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गति धीमी न पड़े.



