
छत्तीसगढ़ के लाखों अन्नदाताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को लेकर एक बेहद दिलचस्प खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए धान के समर्थन मूल्य में 72 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा कर दिया है। पहली नजर में इस खबर को सुनकर प्रदेश के किसान बेहद खुश हैं कि उन्हें अब ज्यादा पैसे मिलेंगे, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस बढ़े हुए दाम का सीधा वित्तीय लाभ छत्तीसगढ़ के किसानों को न मिलकर सीधे राज्य सरकार के खजाने को होने जा रहा है। इसके पीछे धान खरीदी की दरों का एक ऐसा गणित काम कर रहा है, जिससे साय सरकार को करोड़ों रुपये की भारी बचत होगी।
केंद्र सरकार ने बढ़ाया धान का भाव, 72 रुपये प्रति क्विंटल की हुई बढ़ोतरी
केंद्र सरकार हर साल खरीफ फसलों की बुआई शुरू होने से पहले देश भर के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। इसी कड़ी में आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए भी नई दरें जारी कर दी गई हैं। इस बार केंद्र ने सामान्य और ए-ग्रेड धान के भाव में प्रति क्विंटल 72 रुपये की बढ़ोतरी की है। अमूमन इस फैसले से देश के अन्य राज्यों के किसानों की आमदनी सीधे बढ़ जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की विशेष व्यवस्था लागू होने की वजह से यहां जमीनी कहानी पूरी तरह बदल गई है।
छत्तीसगढ़ में लागू है 3100 रुपये का नियम, समझिए क्यों किसानों को नहीं मिलेगा अतिरिक्त लाभ
इस पूरे उलटफेर को समझने के लिए छत्तीसगढ़ में चल रही मौजूदा धान खरीदी व्यवस्था को जानना जरूरी है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सरकार बनने पर किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सत्ता संभालते ही इस वादे को पूरा कर दिया। छत्तीसगढ़ के किसानों को उनकी फसल के लिए हर हाल में फिक्स 3100 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलना तय है। चूंकि केंद्र सरकार द्वारा घोषित नया समर्थन मूल्य अभी भी 3100 रुपये की इस सीमा से काफी नीचे है, इसलिए किसानों को मिलने वाली अंतिम राशि में एक भी रुपये का बदलाव नहीं होगा।
कम हो जाएगा राज्य सरकार के बोनस का बोझ, पहले जेब से मिलाने पड़ते थे ज्यादा पैसे
अब बात करते हैं उस तकनीकी गणित की जिसके कारण यह फायदा सीधे सरकार की झोली में जा रहा है। पहले केंद्र सरकार ने सामान्य धान के लिए 2369 रुपये और ए-ग्रेड के लिए 2389 रुपये एमएसपी तय की थी। किसानों को पूरे 3100 रुपये देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को अपनी जेब से अंतर की राशि यानी प्रति क्विंटल लगभग 731 रुपये (बोनस या इनपुट सब्सिडी के रूप में) मिलाने पड़ते थे। अब चूंकि केंद्र ने अपना हिस्सा 72 रुपये बढ़ा दिया है, तो राज्य सरकार को अब प्रति क्विंटल केवल 659 रुपये ही अपनी तरफ से मिलाने होंगे। साफ है कि केंद्र की बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर पड़ने वाला भार कम हो गया है।
साय सरकार के खजाने में बचेंगे 756 करोड़ रुपये, हर जिले को मिलेगी बड़ी आर्थिक राहत
प्रारंभिक वित्तीय आकलनों के मुताबिक, केंद्र सरकार के इस एक फैसले से छत्तीसगढ़ के बजट को बहुत बड़ी ऑक्सीजन मिल गई है। इस नए मूल्य निर्धारण से साय सरकार के चालू वित्तीय वर्ष के बजट में करीब 756 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी बचत होने का अनुमान लगाया गया है। इस गणना के आधार पर प्रदेश के प्रत्येक जिले पर धान खरीदी के दौरान आने वाला प्रशासनिक और वित्तीय बोझ करीब चार से पांच करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा। इस बची हुई भारी-भरकम राशि का उपयोग सरकार अब अन्य विकास कार्यों में कर सकेगी।
10 हजार करोड़ से नीचे आ जाएगा कुल बोनस का आंकड़ा, पिछले साल रिकॉर्ड खरीदी हुई थी
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का पैमाना बेहद विशाल है। बीते खरीफ सीजन के दौरान राज्य सरकार ने प्रदेश के लगभग 25 लाख पंजीकृत किसानों से रिकॉर्ड 87 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीदी की थी। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में कुल 29,597 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इस कुल भुगतान में से समर्थन मूल्य और 3100 रुपये के बीच के अंतर (बोनस) को चुकाने में ही राज्य सरकार को अपने खजाने से 10,324 करोड़ रुपये अलग से देने पड़े थे। अब 756 करोड़ की बचत होने के बाद यह कुल बोनस का आंकड़ा घटकर 10 हजार करोड़ रुपये के नीचे आ जाएगा।
किसानों को तय समय पर मिलेगी पूरी रकम, सरकारी को-ऑपरेटिव सोसायटियों ने पूरी की तैयारी
हालांकि इस पूरे गणित से किसानों को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होने जा रहा है, उन्हें उनकी मेहनत की पूरी कीमत यानी 3100 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलती रहेगी। राज्य के कृषि विभाग और सहकारी समितियों ने साफ किया है कि आगामी सीजन में भी धान खरीदी की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद रहेंगी। किसानों को उनकी उपज बेचने के बाद समर्थन मूल्य की राशि तुरंत और अंतर की बोनस राशि तय किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। सरकार को मिली इस राहत से धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया और अधिक सुगम होने की उम्मीद है।



