CG Petrol Diesel Price: छत्तीसगढ़ सरकार चाहे तो पेट्रोल ₹36 और डीजल ₹26 तक कर सकती है सस्ता, जानिए प्रति लीटर कहां जा रहा है आपका पैसा

CG Petrol Diesel Price: छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं। राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में ईंधन के आसमान छूते दामों के पीछे सबसे बड़ी वजह टैक्स और अतिरिक्त सेस (शुल्क) का भारी-भरकम बोझ है। तेल की मौजूदा दरों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बाजार में बिक रहे पेट्रोल-डीजल की आधी से ज्यादा कीमत सरकारी खजाने में जा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि राज्य सरकार अपनी तरफ से थोड़ी इच्छाशक्ति दिखाए और करों में कटौती करे, तो प्रदेश के उपभोक्ताओं को पेट्रोल पर प्रति लीटर 36 रुपए और डीजल पर 26 रुपए तक की एक बड़ी राहत मिल सकती है।

ईंधन की कीमतों पर टैक्स और सेस का पूरा हिसाब, जानिए प्रति लीटर कहां जा रहा है आपका पैसा

पेट्रोल और डीजल के खुदरा मूल्य में बेस प्राइस यानी मूल कीमत के अलावा केंद्र और राज्य सरकार के कई तरह के टैक्स जुड़े होते हैं। प्रदेश में ईंधन पर लगने वाले इन करों का पूरा ढांचा इस प्रकार काम करता है:

  • पेट्रोल पर वैट और शुल्क: छत्तीसगढ़ में पेट्रोल पर 24 फीसदी वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) वसूला जाता है, जो प्रति लीटर लगभग 26.06 रुपए बैठता है। इसके अलावा 2 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क भी इसमें जोड़ा जाता है।
  • डीजल पर वैट और शुल्क: डीजल पर राज्य सरकार 23 फीसदी वैट लेती है, जो करीब 23.30 रुपए बनता है। साथ ही इस पर 1 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क अलग से लागू होता है।
  • एक्साइज ड्यूटी: केंद्र सरकार की तरफ से फिलहाल पेट्रोल पर 3 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) लिया जा रहा है, जबकि डीजल पर इसे घटाकर शून्य कर दिया गया है।
  • डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप संचालकों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 4.00 रुपए और डीजल पर 2.55 रुपए का कमीशन मिलता है।
  • परिवहन लागत: रिफाइनरी से लेकर तेल डिपो और पेट्रोल पंपों तक ईंधन पहुंचाने का मालभाड़ा (ट्रांसपोर्टिंग चार्ज) भी इन कीमतों में अलग से जोड़ा जाता है।

12 दिनों के भीतर करीब 8 रुपए तक बढ़े दाम, उपभोक्ताओं पर पड़ा महंगाई का सीधा बोझ

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और स्थानीय स्तर पर लगने वाले सेस के कारण खुदरा दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में ही तेल कंपनियों ने कीमतों में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी की है। मई महीने के मध्य से लेकर अब तक अलग-अलग तारीखों पर ईंधन के दाम इस तरह बढ़े हैं:

  • 15 मई की बढ़ोतरी: इस तारीख को पेट्रोल के दाम में 3.11 रुपए और डीजल में 3.16 रुपए प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया।
  • 19 मई की बढ़ोतरी: तेल कंपनियों ने पेट्रोल पर 90 पैसे और डीजल पर 96 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए।
  • 23 मई की बढ़ोतरी: एक बार फिर कीमतों को ऊपर धकेलते हुए पेट्रोल में 90 पैसे और डीजल में 96 पैसे की वृद्धि की गई।
  • 25 मई की बढ़ोतरी: महीने के आखिरी हफ्ते में पेट्रोल की कीमत 2.70 रुपए और डीजल 2.71 रुपए प्रति लीटर और महंगा हो गया।

इस प्रकार महज 15 मई से लेकर अब तक कुल मिलाकर पेट्रोल के दामों में 7.61 रुपए और डीजल में 7.79 रुपए प्रति लीटर की भारी वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जिसके बाद रायपुर में पेट्रोल का भाव 108.06 रुपए और डीजल का भाव 101.32 रुपए प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में की थी बड़ी कटौती, अब राज्य सरकार के फैसले पर टिकी नजरें

ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च के महीने में एक बड़ा कदम उठाया था। इस सरकारी फैसले के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • एक्साइज ड्यूटी में रियायत: केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपए से सीधे घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दिया था।
  • डीजल को किया ड्यूटी फ्री: केंद्रीय कोटे से डीजल पर ली जाने वाली 10 रुपए की पूरी ड्यूटी को घटाकर शून्य कर दिया गया था, जिससे बड़ी राहत मिली थी।

केंद्र के इस कदम के बाद अब मध्य प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ के कारोबारी और आम नागरिक भी राज्य सरकार की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि कब राज्य शासन अपने वैट (VAT) के प्रतिशत में कटौती कर जनता को बड़ी राहत देगा।

ट्रांसपोर्टिंग भाड़ा बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी, खुदरा बाजार पर बढ़ेगा दबाव

डीजल की कीमतों में आ रही इस बेतहाशा तेजी का सीधा असर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टिंग क्षेत्र पर पड़ने लगा है। परिवहन लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में आम जनता के उपयोग की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बड़ा उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। बाजार के जानकारों के मुताबिक इस मूल्य वृद्धि का असर इन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा:

  • बाहरी राज्यों से आयात: छत्तीसगढ़ में किराना सामान, ताजे फल, हरी सब्जियां और डेयरी उत्पादों की एक बड़ी खेप दूसरे राज्यों से ट्रकों के जरिए रोजाना आती है, जिसका भाड़ा अब बढ़ जाएगा।
  • कृषि उत्पादों का निर्यात: छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों को भेजे जाने वाले धान, चावल और अन्य खाद्य उत्पादों की परिवहन लागत भी महंगी होगी, जिससे प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा।
  • थोक और खुदरा बाजार: माल ढुलाई महंगी होने से थोक व्यापारी अपना मुनाफा बचाने के लिए दाम बढ़ाएंगे, जिसका अंतिम वित्तीय बोझ खुदरा बाजार के माध्यम से आम उपभोक्ता को ही उठाना पड़ेगा।

किराना, सब्जी और दूध के दाम बढ़ने की आशंका, व्यापारियों ने जताई चिंता

सब्जी और किराना बाजार के बड़े कारोबारियों का कहना है कि डीजल के दाम जब भी 100 रुपए के पार जाते हैं, तो ट्रकों और छोटे मालवाहकों का परिचालन खर्च सीधे तौर पर 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए खर्च का असर बहुत जल्द बाजार की इन प्रमुख वस्तुओं पर दिखाई देने लगेगा:

  • रोजमर्रा का किराना: तेल, दालें, शक्कर और मसालों जैसी पैकेट बंद वस्तुओं की कीमतों में परिवहन लागत जुड़ने से खुदरा दाम बढ़ेंगे।
  • हरी सब्जियां और फल: नागपुर, नासिक और आंध्र प्रदेश से आने वाली हरी मिर्च, टमाटर और फलों के दाम स्थानीय मंडियों में आते ही ऊंचे हो जाएंगे।
  • डेयरी और दूध सप्लाई: सुबह के समय ग्रामीण इलाकों से शहरों तक दूध पहुंचाने वाली गाड़ियों का डीजल खर्च बढ़ने से दूध और पैकेट बंद छाछ-दही की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी आशंका है।

Also Read: Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग: 11 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम, जानें आपके शहर का नया रेट

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button