Amit Baghel Case: आखिर क्यों सलाखों के पीछे बंद हैं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल, हाईकोर्ट ने भी दिया झटका

Amit Baghel Case: छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल पिछले काफी समय से जेल में बंद हैं और उनकी रिहाई का रास्ता फिलहाल साफ होता नजर नहीं आ रहा है। उनकी लंबी न्यायिक हिरासत के पीछे सबसे बड़ी वजह बलौदाबाजार में हुई भीषण हिंसा और सरकारी दफ्तरों में की गई आगजनी का मामला है। पुलिस जांच में इस पूरी हिंसक घटना में अमित बघेल की संलिप्तता और साजिश रचने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन्हीं संगीन आरोपों के चलते अदालतों से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

अमित बघेल के वकीलों ने उनकी रिहाई के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि 19 मई को उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से माना कि यह कोई सामान्य कानून-व्यवस्था से जुड़ा छोटा-मोटा अपराध नहीं है। कोर्ट के अनुसार यह सीधे तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती देने और राज्य की करोड़ों रुपये की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने का बेहद गंभीर मामला है।

भीड़ को भड़काने और साजिश रचने के पुख्ता सबूत

पुलिस प्रशासन की ओर से अदालत के सामने कई तकनीकी और व्यावहारिक साक्ष्य पेश किए गए हैं। जांच टीम को मिले सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के आधार पर यह बात सामने आई है कि बलौदाबाजार कांड में अमित बघेल की भूमिका बेहद अहम थी। आरोप है कि वे सीधे तौर पर हिंसा में शामिल न होकर भी पर्दे के पीछे से पूरी रणनीति तैयार कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि उन्होंने ही भड़काऊ भाषणों और संदेशों के जरिए उग्र भीड़ को कलेक्टोरेट पर हमला करने के लिए उकसाया था।

देवी देवताओं पर विवादित टिप्पणी से शुरू हुआ था विवाद

अमित बघेल के जेल जाने की कहानी दो अलग-अलग बड़े विवादों से जुड़ी हुई है। विवादों की शुरुआत अक्टूबर 2025 में राजधानी रायपुर के वीआईपी चौक से हुई थी। वहां छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति के साथ हुई तोड़फोड़ के विरोध में क्रांति सेना प्रदर्शन कर रही थी। इसी आंदोलन के दौरान अमित बघेल ने सिंधी और अग्रवाल समाज के आराध्य देवों भगवान झूलेलाल और महाराजा अग्रसेन पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। इस बयान के बाद पूरे प्रदेश का सामाजिक माहौल गरमा गया था।

प्रदेश भर में दर्ज हुईं 12 एफआईआर और हुई गिरफ्तारी

इस विवादित बयान के बाद छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों और थानों में अमित बघेल के खिलाफ कुल 12 प्राथमिकी दर्ज कराई गईं। चौतरफा दबाव बढ़ता देख अमित बघेल करीब 26 दिनों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार रहे। आखिरकार दिसंबर 2025 में रायपुर पुलिस की विशेष टीम ने घेराबंदी करके उन्हें देवेंद्र नगर थाने के पास से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें रायपुर की सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।

रायपुर जेल में बंद रहते ही मिला प्रोडक्शन वारंट

जब अमित बघेल अपने पहले मामले को लेकर रायपुर की जेल में बंद थे, तभी बलौदाबाजार पुलिस ने उनके खिलाफ एक और बड़ा एक्शन लिया। जनवरी 2026 में पुलिस ने उन्हें पूर्व में हुई ऐतिहासिक बलौदाबाजार हिंसा का सह-आरोपी और मुख्य रणनीतिकार बनाते हुए कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट हासिल किया। इस वारंट के आधार पर बलौदाबाजार पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया। इसके बाद से उनकी मुश्किलें कानूनी तौर पर और ज्यादा पेचीदा हो गईं।

गिरौदपुरी धाम के जैतखाम से जुड़ी है पूरी घटना

Balodabazar Violence Case: बलौदाबाजार की इस मूल घटना की शुरुआत मई 2024 में हुई थी। तब गिरौदपुरी धाम के नजदीक सतनामी समाज के पूजनीय और पवित्र प्रतीक जैतखाम को कुछ असामाजिक तत्वों ने रात के अंधेरे में नुकसान पहुंचाया था। इस घटना के बाद से ही समाज के लोगों में स्थानीय पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर भारी असंतोष था। इसी गुस्से के कारण सतनामी समाज और अन्य संगठनों ने मिलकर 10 जून 2024 को जिला मुख्यालय पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

उग्र भीड़ ने फूंक दिया था पूरा कलेक्टोरेट परिसर

10 जून को आयोजित यह प्रदर्शन अचानक बेहद उग्र और अनियंत्रित हो गया। करीब 7 से 8 हजार लोगों की आक्रोशित भीड़ ने कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के भवन पर धावा बोल दिया। देखते ही देखते उपद्रवियों ने पूरे कलेक्टोरेट परिसर को आग के हवाले कर दिया। इस भीषण आगजनी में परिसर के भीतर खड़ी लगभग 240 से अधिक सरकारी और निजी गाड़ियां जलकर खाक हो गई थीं। इस पूरे तांडव के कारण सरकार को लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

Also Read: CG Religious Conversion RTI Report: छत्तीसगढ़ में 23 सालों में सिर्फ 364 लोगों ने की आधिकारिक धर्मांतरण, चर्चों का आंकड़ा 1500 के पार

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button