
LPG Price Hike: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महंगाई से जूझ रही आम जनता को घरेलू रसोई गैस के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है. तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों की कीमतों में की गई नई बढ़ोतरी के बाद जिले में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर का दाम बढ़कर 1,021.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है. यह नई दरें 7 जून से पूरे जिले में प्रभावी कर दी गई हैं. इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब धमतरी जिले में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ने एक हजार रुपये के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार किया है, जिससे मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
महज तीन महीने के भीतर 89 रुपये महंगा हुआ गैस सिलेंडर, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना मुख्य कारण
लगातार बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की रीढ़ तोड़ कर रख दी है. धमतरी जिले में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब लोग पहले से ही खाने-पीने की चीजों, परिवहन और बच्चों की स्कूल फीस की बढ़ती लागत से परेशान हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो इसी साल मार्च के महीने में सिलेंडर के दाम में 60 रुपये का एकमुश्त इजाफा किया गया था. अब 29 रुपये और बढ़ जाने से महज तीन महीनों के भीतर रसोई गैस कुल 89 रुपये महंगी हो चुकी है. बाजार के जानकारों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और तेल कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ना इसकी मुख्य वजह है.

धमतरी के 2.31 लाख परिवारों पर पड़ेगा सीधा असर, उज्ज्वला योजना के लाभार्थी सबसे ज्यादा परेशान
गैस कंपनियों के इस फैसले का धमतरी जिले में व्यापक और गहरा असर देखने को मिल रहा है. वर्तमान में जिले के भीतर कुल 2.31 लाख घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शन एक्टिव हैं. इस कुल संख्या में से करीब 1.36 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन का लाभ ले रहे हैं. गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले इन परिवारों के लिए अब एक झटके में एक हजार रुपये से अधिक की रकम जुटाकर सिलेंडर रीफिल कराना एक बेहद गंभीर चुनौती बन गया है.
गैस सिलेंडर छोड़ दोबारा पारंपरिक चूल्हे की तरफ लौटे ग्रामीण, कंडे और लकड़ियों का बढ़ गया इस्तेमाल
महंगाई की इस मार के कारण ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत तेजी से बदल रही है. धमतरी के सुदूर वनांचल और देहाती क्षेत्रों में रहने वाले कई गरीब परिवारों ने भारी भरकम कीमत के कारण गैस सिलेंडर का उपयोग पूरी तरह बंद या बेहद सीमित कर दिया है. ग्रामीण महिलाएं अब दोबारा रसोई का काम निपटाने के लिए पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने लगी हैं. गांवों के घरों में एक बार फिर सुबह-शाम लकड़ी और गाय के गोबर से बने कंडों के चूल्हे जलते दिखाई दे रहे हैं, जिससे सरकार की धुआं मुक्त रसोई योजना को भी जमीनी स्तर पर झटका लगा है.

पेट्रोल-डीजल के बाद रसोई गैस महंगी होने से चौतरफा मार, अर्थशास्त्रियों ने जताई गहरी चिंता
स्थानीय अर्थशास्त्री डॉ अनंत दीक्षित का कहना है कि एलपीजी की कीमतों में लगातार होने वाली वृद्धि का असर सिर्फ घर की चौखट तक सीमित नहीं रहता है. पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों की वजह से मालभाड़ा पहले ही चरम पर है, जिसके कारण बाजार में हरी सब्जियों, अनाज, खाद्य तेल और दूध के दाम में औसतन 10 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है. अब जब खाना पकाने का माध्यम भी महंगा हो गया है, तो आम आदमी के मासिक घरेलू खर्च का पूरा गणित बिगड़ जाएगा. इसका सीधा असर लोगों की व्यक्तिगत बचत और उनके जीवन स्तर पर पड़ेगा.
धमतरी के 40 हजार उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी अधूरा, सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होने का बढ़ा खतरा
कीमतों में बढ़ोतरी के बीच जिले में एक और बड़ी प्रशासनिक समस्या सामने आ रही है. धमतरी जिले के लगभग 40 हजार से अधिक गैस उपभोक्ताओं ने अब तक अपनी संबंधित गैस एजेंसियों में जाकर अनिवार्य ई-केवाईसी (E-KYC) की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है. केंद्र सरकार के कड़े नियमों के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं का बायोमेट्रिक या आधार सत्यापन अधूरा रहेगा, उन्हें भविष्य में मिलने वाली सब्सिडी या अन्य सरकारी रियायतों का लाभ मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा. हालांकि गैस एजेंसियां लगातार शिविर लगाकर ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं.
गृहणियों ने सरकार से की कीमतें नियंत्रित करने की मांग
बढ़ती कीमतों को लेकर शहर से लेकर गांवों तक की गृहणियों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है. स्थानीय गृहणियों का कहना है कि हर महीने घर चलाना अब एक मुश्किल काम होता जा रहा है. आय के साधन सीमित हैं लेकिन रोजमर्रा की जरूरत की हर वस्तु के दाम सुरसा के मुंह की तरह लगातार बढ़ते जा रहे हैं. महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई के बाद अब रसोई गैस के दामों ने कीचन का बजट पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है. गृहणियों ने मांग की है कि सरकार को आम जनता को राहत देने के लिए कीमतों पर नियंत्रण लगाने के सख्त कदम उठाने चाहिए.



