CG DEO Transfer List: छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बहुत बड़ी प्रशासनिक सर्जरी: 28 आला अफसरों के तबादले, धमतरी समेत कई जिलों के DEO बदले

CG DEO Transfer List: छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने से ऐन पहले स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में एक बहुत बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई करते हुए एक साथ 28 राजपत्रित अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। मंत्रालय महानदी भवन से जारी हुए इस आदेश ने पूरे महकमे में खलबली मचा दी है। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों और कई सीनियर प्राचार्यों के प्रभार बदले गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार नए सत्र में शासकीय स्कूलों की मॉनिटरिंग व्यवस्था को नए सिरे से चुस्त-दुरुस्त करना चाहती है।

राजधानी रायपुर में हुआ सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव

इस पूरी स्थानांतरण सूची में सबसे प्रमुख बदलाव प्रदेश की राजधानी रायपुर में देखने को मिला है। रायपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) हिमांशु भारतीय को उनके वर्तमान पद से हटाकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में प्रभारी उप संचालक की नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह अब तक लोक शिक्षण संचालनालय में सहायक संचालक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे एम.जी. सतीश कुमार को रायपुर जिले का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। रायपुर में हुआ यह शीर्ष बदलाव काफी मायने रखता है क्योंकि राज्य की अधिकांश बड़ी शैक्षणिक योजनाओं का संचालन इसी केंद्र से होता है।

बिलासपुर और रायगढ़ समेत 12 जिलों के शिक्षा प्रमुख बदले

प्रशासनिक सर्जरी का दायरा केवल राजधानी तक सीमित नहीं है बल्कि सरकार ने महासमुंद, बिलासपुर, सक्ती, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बालोद, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर, कोरिया और बलौदाबाजार जैसे कुल 12 प्रमुख जिलों में नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की तैनाती कर दी है। नई सूची के अनुसार अब महासमुंद की कमान बी.एल. देवांगन को, बिलासपुर की जिम्मेदारी रामेश्वर जायसवाल को और रायगढ़ का प्रभार श्यामानंद साहू को दिया गया है। इसी तरह गरियाबंद में राजेश चंद्राकर और धमतरी में मधुलिका तिवारी को जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ किया गया है।

लोक शिक्षण संचालनालय को मजबूत करने के लिए मैदानी अफसरों को बुलावा

इस तबादला आदेश का एक बेहद दिलचस्प पहलू यह भी है कि सरकार ने कई फील्ड स्तर के अनुभवी अधिकारियों को सीधे नवा रायपुर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के मुख्यालय में अटैच किया है। इन अधिकारियों में नवीन कुमार यादव, सतीश माहेश्वरी, रमाकांत देवांगन, एस.एस. कोमरे और हिमांशु मिश्रा के नाम शामिल हैं। इन सभी को मुख्यालय में अलग-अलग संभागों की निगरानी का काम दिया गया है। इनमें से नवीन कुमार यादव को लेकर चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उन्हें सीधे स्कूल शिक्षा मंत्री की निजी स्थापना से संबद्ध किया गया है।

बस्तर और दुर्ग संभाग के प्रशासनिक समीकरणों में भी बड़ा उलटफेर

विभाग ने मैदानी स्तर पर जमीनी पकड़ रखने वाले कुछ अन्य अधिकारियों को जिला स्तर के कामकाज से मुक्त करके सीधे संभागीय कार्यालयों में बड़ी भूमिकाएं दी हैं। इसी क्रम में रायगढ़ में कार्यरत रहे डॉ. के. वेंकट राव को पदोन्नत करते हुए दुर्ग संभाग का प्रभारी उप संचालक बनाया गया है। वहीं नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में अपनी सेवाएं दे रहे लखन लाल धनेलिया को वहां से हटाकर बस्तर संभाग के मुख्यालय में सहायक संचालक की कुर्सी सौंपी गई है। इसके साथ ही कुछ अधिकारियों को आगामी आदेश तक सीधे संचालक लोक शिक्षण के अधीन सुरक्षित (पूल) रखा गया है।

नारायणपुर और बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नए अफसरों को कमान

नक्सल प्रभावित और सुदूर अंचलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने बीजापुर और नारायणपुर जैसे संवेदनशील जिलों में भी नए प्रशासनिक चेहरों पर दांव लगाया है। आदेश के तहत अभय जायसवाल को बेमेतरा से हटाकर बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले बीजापुर जिले का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा राजेश कुमार पांडेय को नारायणपुर जिले की महत्वपूर्ण कमान सौंपी गई है। सरकार का प्रयास है कि इन पिछड़े क्षेत्रों में अनुभवी चेहरों को भेजकर स्कूलों की अधोसंरचना को तेजी से सुधारा जा सके।

नए शैक्षणिक सत्र से पहले शासकीय स्कूलों का प्रदर्शन सुधारने की बड़ी कवायद

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बड़े फेरबदल को केवल एक सामान्य रूटीन प्रक्रिया नहीं माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रदेश के सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम, शिक्षण की गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और आत्मानंद स्कूलों के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में 16 जून से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र से ठीक पहले सरकार ने इस कड़े कदम के जरिए साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय होगी।

10 जून के सरकारी आदेश के बाद पूरे महकमे में मची खलबली

10 जून 2026 की देर शाम जैसे ही स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर से यह सूची जारी हुई, वैसे ही पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। कई जिलों में नए कप्तानों की तैनाती होने से वहां स्थानीय स्तर पर बरसों से जमे बाबूराज और प्रशासनिक लॉबिंग के समीकरण पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। अचानक हुए इस बड़े बदलाव के बाद अब उन विकासखंडों और संकुलों के प्रभारियों में भी डर का माहौल है जहां लंबे समय से वित्तीय गड़बड़ियों या लापरवाही की शिकायतें लंबित थीं।

जमीनी हकीकत और बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों पर दिखेगा इस फेरबदल का असर

अब शिक्षा जगत के जानकारों के साथ-साथ आम जनता की नजरें भी इस बात पर टिकी हुई हैं कि मंत्रालय द्वारा की गई यह इतनी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी केवल कागजी साबित होती है या फिर इसका कोई वास्तविक असर शासकीय स्कूलों की जमीनी व्यवस्था पर भी दिखाई देता है। नए अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराना, जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत को समय पर पूरा करना और आगामी बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में सुधार लाना होगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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