
Dhamtari Fertilizer Distribution: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिला प्रशासन ने किसानों के लिए खाद वितरण की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए साफ किया है कि जिले के किसानों को सोसायटियों से खाद लेने के लिए फिलहाल एग्रीस्टेक पंजीयन कराना अनिवार्य नहीं होगा। कलेक्टर ने जिले की सभी प्राथमिक कृषि साख समितियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी किसान को खाद की किल्लत न हो और उनकी मांग के मुताबिक समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन के इस संवेदनशील फैसले से उन हजारों ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी कारणों से अब तक अपना डिजिटल पंजीयन नहीं करा पाए थे।
सोसायटियों में 17 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का सुरक्षित स्टॉक मौजूद
धमतरी जिले में यूरिया, डीएपी और एनपीके सहित सभी तरह के रासायनिक खादों की कोई कमी नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए जिले में अब तक कुल 20 हजार 740 मीट्रिक टन खाद का अग्रिम भंडारण किया जा चुका है। इसमें से स्थानीय किसानों ने अपनी बोनी की जरूरत के हिसाब से कुल 7 हजार 599 मीट्रिक टन खाद का उठाव सोसायटियों से कर लिया है। वर्तमान में जिले के विभिन्न गोदामों और सहकारी समितियों में लगभग 17 हजार 141 मीट्रिक टन खाद का अतिरिक्त स्टॉक सुरक्षित रखा हुआ है, जिसका वितरण लगातार किया जा रहा है।
नैनो यूरिया और ड्रोन तकनीक अपनाकर किसान बचा रहे हैं अपना समय और पैसा
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले के अन्नदाताओं से पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की विशेष अपील की है। उन्होंने बताया कि जिले की कई बड़ी सहकारी साख समितियों में अब आधुनिक ड्रोन की सुविधा सरकारी तौर पर उपलब्ध कराई गई है। इस ड्रोन तकनीक के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया का लिक्विड छिड़काव बेहद कम समय में और बहुत प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। इससे न केवल किसानों के शारीरिक श्रम और समय की बचत होती है, बल्कि फसल की पत्तियों को सीधे और समान मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है।
धमतरी के किसानों ने साझा किए अपने जमीनी अनुभव
आधुनिक नैनो यूरिया के इस्तेमाल को लेकर धमतरी विकासखंड के ग्राम लोहरसी के किसान हरिराज सिन्हा ने अपने अनुभव साझा किए हैं। हरिराज पिछले दो सालों से अपने पांच एकड़ के धान के खेत में पारंपरिक बोरी वाले यूरिया की जगह नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लिक्विड यूरिया की बोतलें कम कीमत पर आसानी से मिल जाती हैं और सोसायटियों में लंबी लाइनों में भी नहीं लगना पड़ता। पहले जहां खाद को ट्रैक्टर से ढोने और पूरे खेत में हाथ से छिड़कने में दो से तीन दिन खराब होते थे, वहीं अब ड्रोन की मदद से यह पूरा काम महज कुछ घंटों में निपट जाता है जिससे खेती की लागत में 20 प्रतिशत तक की सीधी कमी आई है।
पॉस मशीन के जरिए पारदर्शी वितरण
धमतरी जिले के कृषि विभाग द्वारा इस बार खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सोसायटियों और निजी दुकानों में यूरिया और डीएपी का वितरण अनिवार्य रूप से पॉइंट ऑफ सेल यानी पॉस (POS) मशीन के माध्यम से अंगूठा लगवाकर किया जा रहा है। इस व्यवस्था से प्रत्येक किसान को उसके राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की जोत के अनुसार ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तय अनुशंसित मात्रा में खाद दी जा रही है। अधिक कीमत वसूलने वाले मुनाफाखोरों पर नकेल कसने के लिए राजस्व और कृषि विभाग के उड़नदस्ता दलों द्वारा लगातार आकस्मिक निरीक्षण किया जा रहा है।
सिर्फ 225 रुपये में उपलब्ध है नैनो यूरिया की बोतल, पारंपरिक बोरी के बराबर ताकत
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले की सभी 96 सहकारी समितियों में खाद की सतत आपूर्ति बनाए रखने के लिए मार्कफेड के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग इस बार नैनो यूरिया के साथ-साथ नैनो डीएपी के उपयोग को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। बाजार में महज 225 रुपये की कीमत में मिलने वाली नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की एक छोटी बोतल, पारंपरिक दानेदार यूरिया की एक पूरी बोरी के बराबर फसलों को पोषण देती है। इससे किसानों को भारी-भरकम बोरियों के परिवहन और भंडारण की असुविधा से भी मुक्ति मिल रही है।
अधिकृत केंद्रों से ही खरीदें सामग्री, गड़बड़ी होने पर जिला नियंत्रण कक्ष में करें शिकायत
जिला प्रशासन ने धमतरी के सभी कृषकों से यह विशेष आग्रह किया है कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और अपनी जरूरत का खाद-बीज केवल शासन द्वारा अधिकृत सहकारी समितियों या वैध लाइसेंस धारी निजी विक्रेताओं से ही खरीदें। यदि कोई भी दुकानदार या समिति प्रबंधक खाद की निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है या कृत्रिम किल्लत दिखाकर खाद देने से मना करता है, तो किसान सीधे जिला नियंत्रण कक्ष के आधिकारिक दूरभाष क्रमांक 07722-232249 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर तुरंत कड़ा एक्शन लिया जाएगा।



