
Dhamtari Electricity Bill Error: छत्तीसगढ़ के धमतरी शहर में बिजली विभाग की लापरवाही या फिर तकनीकी खामी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहाँ एक महिला उपभोक्ता के घर का मासिक बिजली बिल प्रिंटेड कॉपी में कुछ और आया, जबकि इंटरनेट के जरिए डिजिटल भुगतान करते समय वह राशि अचानक कम हो गई. आमतौर पर बिजली बिलों में बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ता परेशान रहते हैं और दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, लेकिन यहाँ बिल की रकम अपने आप घटने से उपभोक्ता खुद असमंजस की स्थिति में है कि आखिर वह किस राशि का भुगतान करे.
महिला उपभोक्ता के पास पहुंचा भारी-भरकम बिल, इंटरनेट पर चेक करते ही उड़ गए होश
यह पूरा वाकया धमतरी शहर की रहने वाली मोहिनी साहू के साथ हुआ है. उनके घर पर बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा इस महीने का जो फिजिकल बिल यानी कागजी पर्ची दी गई थी, उसमें कुल बकाया राशि 2120 रुपये दर्ज थी. महिला जब इस बिल को चुकाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल पेमेंट ऐप पर गई, तो वहां स्क्रीन पर केवल 1300 रुपये की राशि ही दिखाई देने लगी. सीधे तौर पर बिल में करीब 820 रुपये की भारी कटौती स्वतः ही हो गई थी.
सीधे तौर पर कम हो गई 820 रुपये की राशि, तकनीकी गड़बड़ी या मानवीय चूक को लेकर चर्चाएं गर्म
इस विसंगति को देखकर उपभोक्ता और उनके परिवार के लोग पूरी तरह हैरान हैं. एक तरफ जहां बिना किसी शिकायत या आवेदन के ही बिल की रकम में इतनी बड़ी छूट मिल गई, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता को यह चिंता सता रही है कि कहीं यह विभाग का कोई तकनीकी जाल तो नहीं है. स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि कहीं मीटर रीडर द्वारा डेटा एंट्री करते समय कोई मानवीय भूल हुई है या फिर विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य सर्वर में कोई बड़ा सॉफ्टवेयर ग्लिच यानी तकनीकी खराबी आई है.
पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले, रिकॉर्ड दुरुस्त न होने पर बाद में लग सकता है तगड़ा झटका
विद्युत मामलों के जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन बिल में इस तरह का अंतर होना विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है. यदि कोई उपभोक्ता कम दिख रही ऑनलाइन राशि का भुगतान कर भी देता है, तो विभाग के रिकॉर्ड में बची हुई रकम बकाया के रूप में दर्ज रह जाती है. ऐसी स्थिति में अगले महीने के बिल में विभाग उस छूटी हुई राशि को अधिभार यानी पेनाल्टी के साथ जोड़कर भेज देता है, जिससे अंततः उपभोक्ता पर ही दोहरी मार पड़ती है. फिलहाल इस अजीबोगरीब मामले को लेकर बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.



