
Dhamtari Collectorate Gherao Aadivasi Protest: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे वनांचल क्षेत्र के हजारों आदिवासियों ने जिला मुख्यालय का रुख किया. जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले करीब 45 से ज्यादा गांवों के ग्रामीण कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे थे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भारी गतिरोध देखने को मिला. प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए तमाम इंतजाम नाकाफी साबित हुए.

पुलिस की नाकेबंदी और आंसू गैस के गोलों को पीछे छोड़ते हुए कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़े ग्रामीण
नगरी ब्लॉक से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जैसे ही बनरौद के पास पहुंचा, वहां पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी. रास्ते को रोकने के लिए बीच सड़क पर बड़े ट्रकों को आड़ा खड़ा कर दिया गया था. जब भीड़ आगे बढ़ने पर अड़ी रही, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और पुलिसिया घेरे को पार करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से कलेक्ट्रेट मोड़ तक पहुंच गए.

राशन-पानी लेकर पहुंचे आदिवासियों का आरोप कि वे बुनियादी सुविधाओं के बिना नरकीय जीवन जी रहे हैं
प्रदर्शन में शामिल युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं का कहना था कि वे कई पीढ़ियों से विकास की राह देख रहे हैं. आज के दौर में भी उनके गांवों में न तो पक्की सड़कें हैं, न स्वास्थ्य केंद्र और न ही बच्चों के लिए ठीक स्कूल हैं. ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे एक महीने का राशन-पानी अपने साथ लेकर आए हैं. उनका कहना था कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेता, वे वहां से वापस नहीं लौटेंगे.

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के नियमों और वनाधिकार कानूनों को लेकर वन विभाग से टकराव
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके पूर्वज यहां 2009 में टाइगर रिजर्व बनने से बहुत पहले से रह रहे हैं. अब वन विभाग के कड़े नियमों के कारण उनके इलाकों में विकास कार्य ठप पड़े हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग सड़क और पुलिया जैसी जरूरी चीजों के निर्माण में अड़ंगा लगा रहा है, जिससे उनका जीवन पूरी तरह भगवान भरोसे हो गया है.
खराब रास्तों और अस्पताल न होने से प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजातों की टूट रही सांसें
जंगल के भीतरी इलाकों से आईं महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके पास एंबुलेंस तक पहुंचने का रास्ता नहीं है. प्रसव के समय सही समय पर इलाज न मिलने से कई बार मां और नवजात बच्चे दम तोड़ देते हैं. इसके अलावा बारिश के दिनों में स्कूली बच्चों को कीचड़ और नदी-नालों को पार करके जाना पड़ता है, जिससे हमेशा हादसे का डर बना रहता है.

सड़कों और पुलों के निर्माण सहित आदिवासी समाज के अपमान पर अधिकारी के निलंबन की मांग
आंदोलनकारियों ने प्रशासन को सौंपे मांग पत्र में अरसीकन्हार से गरहाडीही, गहनगिरिया से जोरातराई और खल्लारी से नवगांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग रखी है. साथ ही सोंदूर और गरांजी नदी पर पुल निर्माण की बात कही है. इसके अलावा, उन्होंने सांकरा के सुशासन शिविर में आदिवासी समाज पर कथित अभद्र टिप्पणी करने वाले रिसगांव के वन परिक्षेत्र अधिकारी को तुरंत निलंबित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है.
कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने विकास कार्यों का दिया आश्वासन
कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए रायपुर रेंज से करीब 350 से ज्यादा का अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसकी निगरानी खुद आईजी और एसपी कर रहे थे. मौके पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी खड़ी थीं. कलेक्ट्रेट मोड़ पर ग्रामीणों से चर्चा के बाद कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र होने से कुछ नियम अलग हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुल निर्माण और सड़कों की प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिसके बाद ग्रामीण वापस लौटे.



