
BJP Leader KoreaCase: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन लोगों की निर्मम हत्या के आरोपियों का पुलिस ने शहर के बीचों-बीच पैदल जुलूस निकाला. इस जघन्य हत्याकांड में जिला स्तर के प्रभावशाली भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह और उनके दो भाइयों को मौत के घाट उतार दिया गया था. पुलिस ने वारदात के मुख्य सूत्रधार और भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद कड़ा रुख अपनाया है. सरेआम बाजार में घुमाए जाने के दौरान आरोपी हाथ जोड़कर पुलिस के सामने अपनी गलती मानते दिखाई दिए.
रेत खनन और परिवहन के विवाद में 16 जून की रात खेला गया था खूनी खेल
ग्राम नौगई में 16 जून की रात रेत के अवैध कारोबार और परिवहन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था. इस हमले में गंभीर रूप से घायल दो अन्य लोगों का इलाज अभी भी रायपुर के एक अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. पुलिस ने वारदात के तुरंत बाद चार लोगों को दबोच लिया था, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता मनोज त्रिपाठी और उसके परिवार के अन्य सदस्य मौके से फरार हो गए थे, जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी.

कार में पेट्रोल छिड़ककर लगाई आग और फरसे से हमला कर ली तीन की जान
घटना की रात करीब 12 बजे मनोज त्रिपाठी ने समझौते के बहाने भरत सिंह और उनके साथियों को अपने घर के पास बुलाया था. जब वे कार से पहुंचे तो आरोपियों ने पहले एक भारी वाहन से उनकी गाड़ी को टक्कर मारकर रास्ता रोक दिया. इसके बाद कार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई. इस हमले में भरत सिंह की गाड़ी के अंदर ही जलकर मौत हो गई, जबकि उनके भाई वीरेंद्र सिंह पर फरसे से ताबड़तोड़ वार किए गए. तीसरे मृतक नागेंद्र सिंह पेशे से शिक्षक थे, जो इस आगजनी में अस्सी फीसदी तक झुलस गए थे और उन्होंने दम तोड़ दिया.

मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी सहित पांचों बदमाशों का पुलिस ने निकाला पैदल जुलूस
पुलिस ने इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले सभी नौ नामजद आरोपियों को अब सलाखों के पीछे भेज दिया है. शनिवार की देर शाम पुलिस ने पकड़े गए मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी, आशुतोष त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी और गौरव त्रिपाठी को थाने से बाहर निकाला. इन सभी को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शहर की मुख्य सड़कों पर पैदल घुमाया गया, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी.

सरेआम कान पकड़कर उठक-बैठक करते हुए आरोपियों ने मांगी जनता से माफी
जुलूस के दौरान पुलिस की सख्ती के आगे आरोपियों की सारी हेकड़ी गायब हो गई. शहर के बीचों-बीच पैदल चलते हुए सभी आरोपी सरेआम कान पकड़कर उठक-बैठक करने लगे. इस दौरान पुलिस के जवानों के बीच घिरे आरोपी जोर-जोर से नारे लगा रहे थे कि अपराध करना पाप है, पुलिस हमारी बाप है. इससे पहले स्थानीय लोग पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने और उनका चेहरा छुपाने का आरोप लगा रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने यह कदम उठाया.

चार आरोपियों के सरेंडर और की थ्योरी पर लोगों ने उठाए सवाल
इस पूरी कार्रवाई के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. मनेंद्रगढ़ पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी सहित चार लोगों ने थाने आकर खुद आत्मसमर्पण किया था, जबकि पांचवें आरोपी गौरव त्रिपाठी को खड़गवां इलाके से घेराबंदी करके पकड़ा गया था. दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का दावा है कि पुलिस ने इन सभी को जनकपुर क्षेत्र के कोटाडोल स्थित एक गुप्त ठिकाने से पकड़ा है, लेकिन अपनी साख बचाने के लिए इसे सरेंडर का रूप दिया जा रहा है.

दो रसूखदार गुटों की आपसी दुश्मनी के चलते चली आ रही थी पुरानी रंजिश
पुलिस के मुताबिक इस पूरे विवाद की जड़ में इलाके के दो रसूखदार भाजपा नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई थी. मारा गया पक्ष यानी भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह बैकुंठपुर के विधायक भैयालाल के बेहद करीबी माने जाते थे. वहीं दूसरी तरफ हमलावर गुट का मुखिया मनोज त्रिपाठी भरतपुर-सोनहत क्षेत्र की विधायक रेणुका सिंह का करीबी बताया जा रहा है. दोनों पक्षों के बीच रेत के कारोबार में दखल को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी, जिसने अंततः इस खूनी रूप को अख्तियार कर लिया.



