
CG Electricity Contract Workers Protest: छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति और रखरखाव की व्यवस्था आने वाले दिनों में चरमरा सकती है। सरकारी बिजली कंपनियों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने प्रबंधन के साथ वार्ता विफल होने के बाद आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले हजारों कर्मचारियों ने ‘अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन’ शुरू कर दिया है। संगठन ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी सेवा के नियमितीकरण की मांग पूरी नहीं होती, तब तक कोई भी कर्मचारी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेगा। इस फैसले के बाद से ही मैदानी स्तर पर फाल्ट सुधारने और मेंटेनेंस का काम पूरी तरह ठप हो गया है।
बैठक में जिम्मेदार अफसरों के न पहुंचने से आक्रोशित हुए संगठन के प्रतिनिधि
कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरिचरण साहू और महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने प्रशासनिक उदासीनता पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि 22 जून को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (सीएसपीडीसीएल) के उच्च प्रबंधन के साथ इस गतिरोध को सुलझाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक तय की गई थी। लेकिन इस संवेदनशील बैठक में प्रबंधन की ओर से कोई भी निर्णय लेने में सक्षम बड़ा अधिकारी शामिल नहीं हुआ। वहां मौजूद कनिष्ठ अफसरों ने कर्मचारी प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय तक नहीं दिया। प्रबंधन के इस उपेक्षापूर्ण रवैये से भड़ककर संघ ने आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का फैसला किया।
पूर्ववर्ती भर्तियों से तुलना कर संविदा कर्मियों ने लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बिजली कंपनी के प्रशासनिक ढर्रे पर दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि साल 2007, 2009 और 2011 के दौरान भर्ती किए गए संविदा कर्मियों को महज दो साल की सेवा के भीतर ही नियमित कर दिया गया था। इसके विपरीत, साल 2016 और 2018 में नियुक्त किए गए कर्मियों को लगातार आठ से दस वर्षों तक मुस्तैदी से काम करने के बाद भी नियमितीकरण की मुख्यधारा से अलग रखा गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि जब मैदानी स्तर के सारे काम स्थायी प्रकृति के हैं, तो संविदा के नाम पर उनका आर्थिक शोषण क्यों किया जा रहा है।
जान जोखिम में डालकर काम करने के दौरान 41 साथियों ने गंवाई अपनी जान
कर्मचारी संगठन ने इस पूरे आंदोलन को केवल वेतन बढ़ाने की मांग न बताकर अपनी सामाजिक सुरक्षा की बुनियादी लड़ाई करार दिया है। संघ द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हाई वोल्टेज लाइनों के मेंटेनेंस के दौरान होने वाले जानलेवा हादसों में अब तक 41 संविदा कर्मचारियों की अकाल मौत हो चुकी है। इसके अलावा सैकड़ों मैदानी कर्मी करंट की चपेट में आने की वजह से हमेशा के लिए अपंग हो चुके हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होने के बावजूद पावर कंपनी का रवैया पीड़ित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति और मुआवजा देने के मामले में बेहद संवेदनहीन बना हुआ है।
लिखित आदेश मिलने तक जारी रहेगा धरना, आम जनता से मांगी सहूलियत
हड़ताली कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि अब वे किसी भी खोखले आश्वासन के झांसे में नहीं आने वाले हैं। जब तक राज्य सरकार और बिजली कंपनी का उच्च प्रबंधन नियमितीकरण को लेकर कोई ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं करता, तब तक यह राज्यव्यापी धरना जारी रहेगा। संविदा कर्मियों ने प्रदेश की आम जनता से भी एक विशेष भावुक अपील की है। उन्होंने कहा है कि बिजली बंद होने या फॉल्ट सुधरने में होने वाली देरी के कारण जनता को जो परेशानी होगी, उसके लिए वे सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं। उपभोक्ता उनकी इस मजबूरी को समझें और इस न्यायसंगत लड़ाई में उनका साथ दें।



